
वाराणसी। बुधवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी व सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केन्द्र, गांधी नगर, गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में “रिसर्च एथिक्स एंड एकेडेमिक इंटीग्रिटी: लीवरेजिंग डिजिटल टूल्स” विषय पर पांच दिवसीय लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन की शुरुआत श्री अभ्याश सिंह, ड्रिलबिट सॉफ्टटेक के “एंटी-प्लेजरिज़्म टूल्स और उनके उपयोग” विषय पर व्याख्यान से हुई। उन्होंने शोध में साहित्यिक चोरी की रोकथाम हेतु ड्रिलबिट जैसे डिजिटल टूल्स की भूमिका और कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की।
द्वितीय वक्ता डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी द्वारा “संदर्भ सूची का निर्माण एवं प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान और अभ्यास सत्र आयोजित किया गया। सत्र में शोध लेखन में बिब्लियोग्राफी तैयार करने की तकनीकी विधियों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। तृतीय वक्ता डॉ. अनिल कुमार, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने “गुणात्मक एवं मात्रात्मक कार्य हेतु डिटेक्शन टूल्स के उपयोग” विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध कार्य में डेटा की शुद्धता और विश्लेषण की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल टूल्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। सत्र में प्रतिभागियों को विभिन्न टूल्स के व्यावहारिक उपयोग और उनकी सीमाओं की समझ प्रदान की गई। आज के अंतिम वक्ता श्री राजन कुमार, सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केन्द्र ने “रिसर्च इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम” विषय पर एक विशेष सत्र का संचालन किया। उन्होंने शोधकर्ताओं की प्रोफाइल निर्माण, संस्थागत शोध डेटा के प्रबंधन और विश्लेषण हेतु विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सत्र में प्रतिभागियों को इरिन्स और शेरनी के माध्यम से शोध पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने की रणनीतियाँ साझा की गईं।
इस पांच दिवसीय लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों से 48 प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का सह-समन्वयन डॉ. चक्रधर राणा व श्री मनोज कुमार के. कर रहे हैं।
