
वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय, वाराणसी में बुधवार को हिन्दी विभाग द्वारा प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम सभागार में आयोजन सम्पन्न हुआ। जिसका विषय “प्रेमचन्द की कहानियों में स्त्री” रहा।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण से हुआ।
संगीत विभाग की अध्यक्षा प्रो सीमा वर्मा के निर्देशन में संगीत विभाग की छात्राओं ने सुमधुर कुलगीत का गायन किया गया । महाविद्यालय की प्राचार्या, प्रबंधक और हिन्दी विभागाध्यक्ष ने मुख्य अतिथि वक्ता प्रो आभा गुप्ता ठाकुर (आचार्य, हिन्दी विभाग, का.हि.वि.वि.) को उत्तरीय और पौधा देकर सम्मानित किया।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो0 रचना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए प्रेमचन्द को हिन्दी साहित्य का महान पुरोधा बताया।
उन्होंने कहा कि प्रेमचन्द का साहित्य समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों को स्वर प्रदान करता है। उनका साहित्य ग्रामीण भारत का दस्तावेज है। उनकी कहानियाँ मानवीय संवेदनाएँ, बाल मनोविज्ञान इत्यादि विविधता से भरे हुए हैं।अगर भारत की संस्कृति और संवेदना को समझना हो तो प्रेमचंद के साहित्य को अवश्य पढ़ना चाहिए
विषय-प्रवर्तन करते हुए हिन्दी विभाग की अध्यक्षा प्रो. आशा यादव ने कहा कि प्रेमचन्द के साहित्य में व्यापक राष्ट्रवाद, नारी के स्थान एवं उसके परिवर्तित होते रूप तथा नारी जागरण का संदेश मिलता है। वे अपनी कहानियों में केवल हाशिये पर खड़ी स्त्री की समस्याओं का चित्रण नहीं करते अपितु नारियों को जागरूक भी करते हैं। आज की संगोष्ठी की मुख्य वक्ता प्रो० आभा गुप्ता ठाकुर ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य दो महत्वपूर्ण घटनाओं से प्रेरित रहा- प्रथम उन्नीसवीं सदी का सुधारवादी आंदोलन और दूसरा भारतीय नवजागरण। प्रेमचंद की कहानियों पर बात करते हुए आपने रवीन्द्रनाथ टैगोर और शरतचंद्र के स्त्री पात्रों का भी तुलनात्मक उल्लेख किया। इनकी कहानियों में स्त्री विविध रूपों में दिखाई देती है। कहीं वह त्याग मयी मां और स्नेह की प्रतिमूर्ति है तो कहीं स्त्री आंतरिक संघर्ष और आत्म- सम्मान की खोज करती है, वह समाज की धारणाओं से जूझती है तथा श्रम एवं आत्म-निर्भरता का प्रतीक भी बनती है।
इसके पश्चात् डॉ० प्रीति विश्वकर्मा के निर्देशन में छात्राओं द्वारा प्रेमचन्द की प्रसिद्ध कहानी “पत्नी से पति” का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने अत्यन्त सराहा। प्रेमचंद के साहित्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं चित्रांकन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरण भी किया गया । कार्यक्रम के अंत में हिन्दी विभाग की सहअध्यापिका डा. सपना भूषण ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
