
वाराणसी । शुक्रवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी में 22 से 27 सितंबर 2025 तक छः दिवसीय ‘एकेडमिक लीडरशिप 5.0: नेविगेटिंग नेशनल एंड ग्लोबल ट्रेंड्स’ कार्यक्रम के पाँचवे दिन की शुरुआत डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी के ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम्स : रोल ऑफ़ एकेडिमिक लीडर्स इन टुडेज़ एजुकेशन’ विषय पर ओजपूर्ण व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक नेतृत्वकर्ता भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर उच्च शिक्षा में नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षण को बढ़ावा दे सकते हैं। साथ ही उन्होंने बल दिया गया कि अकादमिक नेतृत्व भारतीय संस्कृति और वैश्विक दृष्टिकोण के बीच सेतु का कार्य कर सकता है।
दूसरे सत्र में डॉ. राज सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी ने ‘स्किल एंड होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ़ स्टूडेंट्स : द रोल ऑफ़ फैकल्टी लीडर्स’ विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि फैकल्टी लीडर्स को विद्यार्थियों के कौशल व समग्र विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि वे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षकों को विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे कौशल विकसित करने चाहिए। । तीसरे सत्र में डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई, वाराणसी ने ‘डिज़ाइनिंग होलिस्टिक एंड फ़्लेक्सिबल करिकुला इन द लाइट ऑफ़ एनईपी 2020’ विषय पर व्याख्यान देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित लचीले व समग्र पाठ्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि इससे उच्च शिक्षा अधिक प्रासंगिक व छात्र-केंद्रित बन सकती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को बहुविषयक शिक्षा और जीवन कौशल प्रदान कर भविष्य के लिए सक्षम बनाता है। आज के अंतिम सत्र में डॉ. राज सिंह, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने ‘समूह चर्चा एवं प्रस्तुति’ के अंतर्गत प्रतिभागियों से भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास और पाठ्यचर्या के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए।
इस छः दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम में देश के 20 से अधिक राज्यों यथा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, नई दिल्ली इत्यादि के 100 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का संयोजन डॉ० अनिल कुमार और सह-संयोजन डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा किया जा रहा है।
