
वाराणसी।श्रीविद्यामठ में शनिवार को आदि गुरु शंकराचार्य के परम प्रिय शिष्य और ज्योतिर्मठ के प्रथम आचार्य श्री तोटकाचार्य जी का पट्टाभिषेक दिवस अत्यंत हर्षोल्लास और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मठ परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
प्रातः काल में भगवान श्री तोटकाचार्य जी की प्रतिमा का विशेष पूजन किया गया। ‘तोटकाष्टकम्’ का सामूहिक सस्वर पाठ मठ के शिष्यों ने किया।
प्रभारी परमात्मानन्द जी ने बताया कि किस प्रकार आचार्य गिरि ने अपनी अनन्य गुरु-भक्ति से ‘तोटक’ छंद में स्तुति कर अद्वैत दर्शन को सरल बनाया।
वर्तमान पूज्यपाद शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: जी महाराज शनिवार को सहारनपुर में शाकम्भरी शक्ति पीठ में हैं।
उन्होंने वहाँ अपने आशीर्वचन में कहा श्री तोटकाचार्य जी का जीवन सेवा और समर्पण की पराकाष्ठा है। उन्होंने सिद्ध किया कि गुरु की कृपा से सेवा करते हुए भी ज्ञान को प्राप्त किया जा सकता है। शिष्य गुरु कृपा से प्रकाण्ड विद्वान बन सकता है। उन्होंने कहा कि लोग समझते हैं कि तोटकाचार्य जी मूर्ख थे परन्तु वे अपने ज्ञान को प्रकट नहीं करते थे लेकिन जब आदि शंकराचार्य ने आदेश किया तो उन्होंने न केवल तोटक छन्द में उनकी स्तुति की अपितु श्रुतिसारसमुद्धरण नामक एक ग्रन्थ भी रच दिया जिसने सम्पूर्ण वेदांत ज्ञान का सार निहित है। आज के युग में उनकी गुरु-निष्ठा हम सभी के लिए अनुकरणीय है।
इस पावन तिथि पर मठ में भण्डारे का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं और शिष्यों ने प्रसाद ग्रहण किया।
सायंकाल में विशेष आरती के साथ उत्सव का समापन हुआ।
इस अवसर पर दण्डी स्वामी दुर्गानन्द सरस्वती, साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, ब्रह्माचारी परमात्मानन्द, मठ के प्रबंधक कृष्ण कुमार द्विवेदी, हजारी कीर्ति नारायण, ए.यू. बैंक के शाखा प्रबंधक सूरज, जगदीश बाबा एवं विनीत आदि श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने दी है।
