वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा द्वारा सोमवार को युवा दिवस के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का विषय “Self-Development & Mental Health” रहा। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. राकेश के. उपाध्याय, निदेशक, भाषा पत्रकारिता, भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली रहे

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में हुआ। अपने संबोधन में प्राचार्या ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवाओं के लिए आत्मविकास और मानसिक स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा और तेज़ जीवनशैली के इस दौर में मानसिक संतुलन बनाए रखना ही वास्तविक सफलता की कुंजी है।

मुख्य वक्ता प्रो. राकेश के. उपाध्याय का व्याख्यान अत्यंत इंटरएक्टिव और संवादात्मक रहा, जिसमें छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने आत्मचिंतन, आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच को मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख आधार बताते हुए छात्राओं को जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

प्रो. उपाध्याय ने स्वामी विवेकानंद को “Communicator par Excellence” बताते हुए कहा कि संप्रेषण जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कौशल है। उन्होंने कहा, “आप क्या जानते हैं, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना महत्वपूर्ण यह है कि आप उसे दूसरों तक कैसे पहुँचा पाते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की शुरुआत स्वयं की श्वास-प्रश्वास (Breathing Exercises) से होती है, क्योंकि सही श्वसन से मन और शरीर दोनों संतुलित रहते हैं। भारतीय संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सभी संस्कृतियों की जड़ और सार है, और हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए।

प्रो. उपाध्याय ने छात्राओं को कौशल विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “आज के समय में नौकरी डिग्री से नहीं, बल्कि कौशल से मिलती है।” उन्होंने छात्राओं को अपनी क्षमताओं को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने अद्वैत वेदांत पर भी प्रकाश डालते हुए आत्मबोध और आत्मचेतना के महत्व को रेखांकित किया तथा इसे मानसिक शांति और आत्मविकास से जोड़ा।

कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की यूथ कमेटी द्वारा किया गया, जिसमें समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों की भी सक्रिय उपस्थिति रही।

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