
वाराणसी।वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना के आख़िरी दिन भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ तत्पश्चात् श्रद्धापूर्ण गणेश वंदना एवं प्रेरणादायी ‘सर्जना गीत’ की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प्राचार्या द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया तथा महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘वसंत श्री’ का विमोचन संपादिका डॉ सुप्रिया सिंह ने किया । इसके उपरांत डॉ. आरती कुमारी ने सर्जना समारोह के प्रतिवेदन का वाचन किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में श्रीमती उमा भट्टाचार्य (प्रबंधक), श्री राजेश भाटिया (अध्यक्ष, द स्मॉल इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन, वाराणसी), प्रो. विधि नगर (प्रदर्शन कला संकाय, बीएचयू) तथा प्रो. रंजन कुमार (डीन ऑफ स्टूडेंट्स, बीएचयू) उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में फादर सुसाई राज (प्रधानाचार्य, सेंट जॉन्स स्कूल, मरहौली) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में ‘सर्जना’ महोत्सव की स्थापना का इतिहास बताते हुए इसके उद्देश्य एवं विकास-यात्रा पर प्रकाश डाला।
प्रो. रंजन कुमार ने छात्राओं को उनकी प्रस्तुतियों के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऐसे मंच व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम होते हैं।
प्रो. विधि नगर ने अपने उद्बोधन में महाविद्यालय की सराहना करते हुए महाविद्यालय को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार एवं सृजनात्मकता का सशक्त मंच बताया और महाविद्यालय परिवार को वार्षिक पत्रिका ‘वसंत श्री’ के सफल विमोचन पर हार्दिक बधाई दी।
संगीत विभाग की छात्राओं वैदेही निमगांवकर एवं जयंतिका डे द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय गायन तथा डॉ. शांता चटर्जी ,प्रो. पूनम पांडेय एवं श्री सौम्यकांति मुखर्जी की शिक्षक प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध किया।
हिंदी एवं अंग्रेज़ी कविता-पाठ, एकल नृत्य एवं समूह नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विविध रंगों से आलोकित किया। 6 दिनों से चल रहे सर्जना प्रतियोगिता के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम ,द्वितीय, तृतीय पुरस्कार एवं सांत्वना पुरस्कार छात्राओं को प्रदान किए गए इसके साथ ही चल वैजयंती और सर्जना क्वीन का पुरस्कार भी छात्राओं को दिया गया।
अंत में डॉ सरोज उपाध्याय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। संपूर्ण आयोजन सांस्कृतिक समृद्धि, अनुशासन एवं उत्साह का अनुपम उदाहरण रहा।
