
अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में कार्यशाला का दूसरा दिन
वाराणसी । मंगलवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट.’” विषय पर एक पाँच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम वक्ता प्रो. सी. बी. शर्मा, कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन ह्यूमैनिटीज़: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानविकी शिक्षण में आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक समस्याओं से जुड़ी अध्ययन-पद्धति को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को विश्लेषणात्मक दृष्टि और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने हेतु नवोन्मेषी शिक्षण विधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण विकसित करना चाहिए, जहाँ शिक्षकों को अधिक स्वायत्तता के साथ-साथ उत्तरदायित्व भी प्रदान किया जाए।
द्वितीय सत्र के वक्ता डॉ. उदय प्रताप सिंह, एचबीटीयू, कानपुर ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन मैथमेटिक्स: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि एक प्रभावी शिक्षक का निर्माण किस प्रकार किया जा सकता है साथ ही उन्होनें गणित में रूपांतरित शिक्षण पद्धतियों की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने उदाहरणों और केस स्टडी के माध्यम से गणित शिक्षण की नवाचारी पद्धतियों को स्पष्ट किया। अंतिम दो सत्रों में प्रतिभागियों ने विषय- आधारित समूहों में शिक्षण रणनीतियों के निर्माण पर गहन विचार-विमर्श किया। इन समूहों ने सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, मानविकी तथा प्रबंधन विषयों के लिए मॉड्यूल्स का रूपरेखा-निर्माण किया।
चर्चाओं के दौरान अनुशासन-विशिष्ट आवश्यकताओं और शैक्षणिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संरचित ढाँचा तैयार किया गया। सक्रिय सहभागिता और सामूहिक चिंतन के परिणामस्वरूप अनेक व्यावहारिक, सार्थक एवं क्रियान्वित किए जा सकने वाले सुझाव सामने आए। ये सभी सुझाव विकसित किए जाने वाले मॉड्यूल्स का महत्वपूर्ण भाग बनेंगे।
इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के 40 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम का संयोजन आईयूसीटीई के सभी संकाय सदस्यों द्वारा किया जा रहा है।
