
कार्यशाला का चौथा दिन
वाराणसी। गुरुवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “ट्रांसफॉर्मिंग पेडागॉजी इन हायर एजुकेशन: साइंसेज़, मैथमेटिक्स, सोशल साइंसेज़, ह्यूमैनिटीज़ एंड मैनेजमेंट’ विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला के चौथे दिन के प्रथम सत्र के वक्ता डॉ. सोमू सिंह, शिक्षा संकाय, बी.एच.यू, ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन सोशल साइंसेज़: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत में सामाजिक विज्ञानों के क्षेत्र में नई पहल की जा रही है। अब छात्रों को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं पर विचार करने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आलोचनात्मक चिंतन और अनुसंधान आधारित शिक्षा से युवाओं में रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार शिक्षा को अधिक प्रासंगिक और प्रभावी बनाएगा।
द्वितीय सत्र के वक्ता डॉ. ई. रामगणेश, बी.डी.यू, तमिलनाडु ने “पेडागॉजिकल इनोवेशन इन सोशल साइंसेज़: क्रिटिकल थिंकिंग एंड रियल-वर्ल्ड इन्क्वायरी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
उन्होंने बताया कि सामाजिक विज्ञानों में शिक्षा पद्धति को नया रूप दिया जा रहा है। छात्रों को अब केवल किताबों तक सीमित न रखकर वास्तविक समस्याओं जैसे डिजिटल विभाजन, बेरोज़गारी और शैक्षिक असमानताएं आदि पर विचार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। समस्या समाधान के लिए डिज़ाइन थिंकिंग, समूह चर्चा और प्रोजेक्ट आधारित अधिगम जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस नवाचार से छात्र न केवल आलोचनात्मक चिंतन विकसित करेंगे बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता भी पाएंगे।
सक्रिय सहभागिता और सामूहिक चिंतन के परिणामस्वरूप अनेक व्यावहारिक, सार्थक तथा क्रियान्वित किए जा सकने वाले सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों में शिक्षण-पद्धतियों के नवाचार, अंतर्विषयक दृष्टिकोण का समावेश, तथा विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु विविध गतिविधियों का प्रस्ताव सम्मिलित है। ये सभी सुझाव आगामी मॉड्यूल्स के अभिन्न अंग के रूप में सम्मिलित किए जाएंगे, जिससे न केवल विषय-विशेष की गहन समझ विकसित होगी, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता भी सुदृढ़ होगी।
इस प्रकार, यह प्रयास संस्थान की शैक्षणिक दृष्टि को अधिक सुसंगत, समकालीन और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में बिहार, जम्मू, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के 40 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन आईयूसीटीई के सभी संकाय सदस्यों द्वारा किया जा रहा है।
