वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही स्थित स्मारक परिसर में ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ( लमही) द्वारा आयोजित इस साहित्यिक श्रृंखला के 1833वें दिवस पर प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘प्रायश्चित’ का भावपूर्ण पाठ जान्हवी सिंह ने किया। प्रो. श्रद्धानंद, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव तथा निदेशक राजीव गोंड ने जान्हवी सिंह को सम्मानित किया। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि ‘प्रायश्चित’ केवल एक व्यक्ति की कथा नहीं, बल्कि पूरे समाज की मानसिकता का दर्पण है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से स्पष्ट किया है कि सच्चा धर्म मानवता है और सच्चा प्रायश्चित आत्म-सुधार। उन्होंने कहा कि यह रचना आज भी समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है कि हम कर्मकांडों के जाल में उलझे हैं या सच्चे नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए तैयार हैं। इस अवसर पर राहुल यादव, रोहित गुप्ता, चंदन मौर्य, विपनेश सिंह, संजय श्रीवास्तव, ऋषभ आदि थे। संचालन आयुषी दूबे और अतिथियों का स्वागत मनोज विश्वकर्मा ने किया।

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