वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान – दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क), वाराणसी ने कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से 16 अप्रैल 2026 को मंडी के कोट पंचायत में किसानों के लिए प्राकृतिक खेती पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बढ़ती लागत और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए टिकाऊ और कम लागत वाली खेती को बढ़ावा देना था। इस प्रशिक्षण में लगभग 60 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन आइसार्क के विशेषज्ञों—डॉ. अजय कुमार मिश्रा, श्रीनिवास रेड्डी और गायत्री हेत्ता ने किया। इनके साथ फील्ड टेक्नीशियन जया शर्मा और विपाशा ठाकुर भी शामिल रहीं। कृषि विभाग के अधिकारियों, जैसे ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर लेख राज और एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजर सविता चौहान ने भी भाग लिया और अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से रासायनिक सामग्री पर निर्भरता कम होती है, साथ ही मिट्टी की सेहत और खेती की दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार होता है। उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में, जहां संसाधनों का सही उपयोग बहुत जरूरी है, प्राकृतिक खेती काफी उपयोगी है।

प्रशिक्षण में परस्पर सत्र और प्रायोगिक प्रदर्शन शामिल थे, जिनमें प्राकृतिक इनपुट तैयार करने और उनके उपयोग के तरीके सिखाए गए। किसानों को इन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव मिला और उन्होंने इन्हें अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। किसानों ने माना कि इससे लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन की स्थिरता बढ़ेगी। यह कार्यक्रम क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि को मजबूत करने में सहायक साबित होगा।

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