
वाराणसी।परमाराध्य परमधर्माधिश अनंतश्रीविभूषित जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में गोरखपुर से निकली 81 दिवसीय गविष्ठी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के काशी पहुंचने पर जगह जगह शंकराचार्य जी का गौभक्त सनातनी जनता ने पुष्प वर्षा कर ढोल नगाड़े के थाप पर जयघोष के साथ स्वागत अभिनंदन किया।
गविष्ठी यात्रा का रोहनिया में सुभाष राजभर, अखरी बाईपास पर सुनील राय अजय सिंह,लंका पर राकेश पाण्डेय दिनेश तिवारी,गुरुधाम पर राजेंद्र सिंह,रथयात्रा पर रवि त्रिवेदी,हजारी कीर्ति शुक्ला,सिगरा पर श्रीराम द्विवेदी,तेलीय बाग पर महामृत्युंजय मंदिर के महंत व सपा नेता किशन दीक्षित,विनय पाण्डेय, कचहरी पर बार कौंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी, सेंट्रल बार के पूर्व अध्यक्ष विवेक शंकर तिवारी,सेंट्रल बार के पूर्व महामंत्री अनिल पाठक एवं जाल्हूपुर में अवधेश पाठक,सौरभ पाठक के नेतृत्व में जोरदार स्वागत किया गया।इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ उपस्थित रही।
उल्लेखनीय है कि इस दौरान भरी संख्या में सहभागी मातृशक्तियों ने कलश यात्रा निकाला।
गौसभा में शंकराचार्य जी महाराज ने “कालनेमि को पहचानो” विषय पर अत्यंत ओजस्वी प्रवचन देते हुए कहा कि पूर्व के आक्रमण और वर्तमान आक्रमण में मूलभूत अंतर है यह है कि पूर्व में शत्रु की पहचान स्पष्ट थी इसलिए हम उससे लड़ सके और उसे परास्त किया।वर्तमान समय के आक्रमण में शत्रु ने हमारा ही वेश धारण कर लिया है माथे पर तिलक,मुख में जय श्रीराम,गले में गेरुआ और भीतर से गौ हत्या का समर्थन ऐसे में इन कालनेमियों को पहचानना ही वर्तमान में हिंदू समाज की सबसे बड़ी चुनौती है।
महाराजश्री ने रामायण की कथा सुनाते हुए कहा कि जब रावण को युद्ध में पराजय का आभास हुआ, तो उसने अपने सभी राक्षसों को आज्ञा दी कि माथे पर तिलक लगाओ, गले में माला डालो और “जय श्रीराम” का नारा लगाते हुए राम की सेना से भिड़ जाओ।राम की सेना युद्ध रोकने पर विवश हो गई क्योंकि पहचान ही नहीं हो रही थी कि शत्रु कौन है।तब भगवान ने कहा “रूप धारण कर लेने से कोई संत नहीं हो जाता।ठीक प्रकार हिंदू होने के लिए हिंदू जैसे कपड़े नहीं, हृदय में हिंदू भाव होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि इसी तरह कालनेमि ने भी साधु का वेश धारण किया था, किंतु हनुमान जी ने परीक्षा लेकर उसे पहचाना और परास्त किया।उसी तरीके से आज के राजनैतिक कालनेमियों ने अपना रूप धार्मिक बनाया और धर्म का विनाश किया।जिनके माथे पर कभी टीका-चंदन नहीं देखा गया, उन लोगों ने भी माथे में टीका लगाकर, गले में भगवा दुपट्टा डालकर और हाथ में कलावा बांधकर मांस भक्षण का प्रदर्शन किया,इससे स्पष्ट होता है कि धार्मिक वेश बनाकर ये लोग मांस भक्षण की प्रेरणा देश की जनता को दे रहे हैं।ऐसे कालनेमियों से देश को सतर्क रहने की जरूरत है।
महाराजश्री ने ‘Beef’ निर्यात के नाम पर गौ मांस निर्यात का पर्दाफाश करते हुए कहा “गाय को ‘Cow’ कहते हैं, भैंस को ‘Buffalo’ दोनों के मांस का एक नाम ‘Beef’ क्यों? इसीलिए,क्योंकि भैंस के मांस के नाम पर गाय का मांस बेचना है।”उन्होंने कहा कि एक ट्रक में पकड़ा गया मांस लेबोरेटरी परीक्षण में गाय का सिद्ध हुआ जिसका अर्थ है कि लगभग १२,००० गायों का मांस एक ट्रक में लदा था। उन्होंने भोपाल के सरकारी स्लॉटरहाउस का भी उल्लेख किया जहाँ गाय का मांस काटकर कोल्ड स्टोरेज में भेजा गया।
महाराजश्री ने असम के मुख्यमंत्री के उस वक्तव्य का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने खुले तौर पर कहा था कि गौ मांस खाने वालों का वोट उन्हें क्यों नहीं चाहिए “घर में खाओ, बाहर मत खाओ।” उन्होंने कहा “जिनके मुख में राम, बगल में छुरी उनसे दूरी जरूरी है।” उन्होंने मछली खाने के समय तिलक लगाने वाले नेताओं की तीखी आलोचना करते हुए कहा “जब भाषण देते हो तब तिलक नहीं, जब मछली खाते हो तब तिलक इसका एकमात्र उद्देश्य धर्म के प्रतीकों का उपयोग धर्म को बदनाम करने के लिए है।”
महाराजश्री ने पापियों की शास्त्रीय परिभाषा बताई अनुमंता (अनुमति देने वाला),विशसिता (काटने वाला),नियंता,क्रय-विक्रयी संस्कर्ता (पकाने वाला),भोक्ता (खाने वाला) आदि। उन्होंने कहा “जो गौ हत्यारी पार्टी या प्रत्याशी को वोट देता है,उसे भी कहीं न कहीं गौ हत्या का पाप लगता है।”
शंकराचार्य जी महाराज ने रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में “एक वोट, एक नोट” अभियान के तहत गौधाम निर्माण के लिए आह्वान किया।उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को वैदिक मंत्र “अहं हन्मि वृत्रं गविष्टौ” का सामूहिक संकल्प दिलाते हुए कहा यह”जो धर्मयुद्ध हो रहा है,उसमें गाय को सताने वाले असुरों को परास्त करने का हमने संकल्प किया।”
उन्होंने घोषणा की कि यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए,तो 24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना (२,१८,७०० सैनिक) के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
उक्त जानकारी देते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि मिर्जापुर में लंबे समय स्व.अशोक सिंहल के साथ कार्य कर चुके संघ एवं भाजपा नेता मनोज श्रीवास्तव ने शंकराचार्य जी महाराज के समक्ष संकल्प पूर्वक भाजपा को छोड़कर शंकराचार्य जी के गौरक्षा आंदोलन में सम्मिलित होकर अपना श्रेष्ठ योगदान प्रदान करने का वचन दिया।एवं शंकराचार्य जी के सान्निध्य में प्रदेश के समस्त 403 विधानसभाओं में जाकर सनातनियों को गौरक्षा हेतु सर्वश्रेष्ठ योगदान देकर अपना जीवन धन्य बनाने हेतु प्रेरित करने वाली यह गविष्ठी यात्रा कल अजगरा,पिंडरा सेवापुरी,भदोही होते हुए अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान करेगी।
इस दौरान प्रमुख रूप से सर्वश्री~साध्वी पूर्णांबा दीदी,साध्वी शारदांबा दीदी,गिरीश तिवारी,रमेश उपाध्याय,देवेंद्र पाण्डेय,पंकज पाण्डेय,अभय शंकर तिवारी,सुनील शुक्ला,हर्ष मिश्रा सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।










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