
रिपोर्ट अनुपम भट्टाचार्य
वाराणसी।श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण दिव्य वातावरण में संत निरंकारी मिशन द्वारा युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह जी की स्मृति में संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में परम् श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के सान्निध्य में भावपूर्ण संत समागम का आयोजन हुआ। मलदहिया स्थित सत्संग भवन पर आयोजित विशेष सत्संग को वाराणसी जोन के जोनल इंचार्ज श्री सिद्धार्थ शंकर सिंह जी ने सम्बोधित किया।
इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में फरमाया कि बाबा जी का सम्पूर्ण जीवन मानवता, सेवा और प्रेमा भक्ति का दिव्य उदाहरण रहा। उन्होंने प्रेरित किया कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण सार्थक बने और हर पल इंसानियत, करुणा एवं मानवीय मूल्यों का प्रमाण प्रस्तुत करे। बाबा जी ने सदैव यही शिक्षा दी कि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर मानवीय गुण विकसित कर निराकार का आसरा लेते हुए सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जीयें।
सतगुरु माता जी ने फरमाया कि यदि किसी के जीवन में दुख, पीड़ा या संघर्ष है, तो हमारा कर्तव्य उसे बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता और सहयोग से उसे शांत करना है। जीवन ऐसा हो जो रिश्तों में प्रेम एवं समर्पण की भावना को सुदृढ़ करे। यही बाबा जी की शिक्षाओं का सार और सच्ची मानवता का स्वरूप है।
सतगुरु माता जी ने समझाया कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने के पश्चात जीवन केवल व्यक्तिगत सीमाओं तक नहीं रहता, बल्कि समस्त मानवता की सेवा, कल्याण और उत्थान का माध्यम बन जाता है। सच्ची सेवा दिखावे से परे प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थता से परिपूर्ण होती है, जबकि वास्तविक भक्ति शब्दों से आगे बढ़कर व्यवहार, विचार और कर्मों में झलकती है।
अंत में सतगुरु माता जी ने आशीर्वाद दिया कि प्रत्येक जीवन सेवा, सुमिरण और सत्संग को अपनी प्राथमिकता बनाए तथा हर हृदय निराकार में समर्पित होकर प्रेम, शांति और मानवता बाँटने का सशक्त
माध्यम बने।










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