
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर विशेष
वाराणसी | सी०पी०आर० एवं जनस्वास्थ्य जागरूकता विशेषज्ञ डा शिवशक्ति प्रसाद व्दिवेदी ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर भारत में बढ़ते हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के खतरे ने एक बार फिर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता उत्पन्न कर दी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) तथा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 28% वयस्क आबादी उच्च रक्तचाप से प्रभावित है। अर्थात भारत का लगभग हर चौथा वयस्क हाई बीपी की समस्या से जूझ रहा है।
हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन यह हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और समयपूर्व मृत्यु जैसी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में होने वाली लगभग 17.5% मौतें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हाइपरटेंशन एवं उससे जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं।
स्थिति का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हाई बीपी से पीड़ित लगभग 53% लोगों को यह तक ज्ञात नहीं होता कि वे इस बीमारी की चपेट में हैं। परिणामस्वरूप, अधिकांश मरीज तब तक इलाज नहीं कराते जब तक उन्हें गंभीर हृदयाघात या ब्रेन स्ट्रोक जैसी जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ता।
उत्तर प्रदेश की स्थिति भी अत्यंत गंभीर है। NFHS के हालिया निष्कर्षों के अनुसार, राज्य में प्रत्येक 4 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति उच्च रक्तचाप से प्रभावित है अथवा उसके जोखिम में है। वहीं AIIMS से जुड़े ओपीडी आंकड़ों के अनुसार, अस्पतालों में आने वाले लगभग 25% मरीज हाइपरटेंशन के रिस्क कैटेगरी में पाए जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक नमक का सेवन, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, बढ़ता मोटापा, तनाव, धूम्रपान तथा नियमित स्वास्थ्य जांच की कमी इस बीमारी के तेजी से फैलने के प्रमुख कारण हैं।
भारत सरकार ने गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम हेतु “75/25 पहल” के अंतर्गत व्यापक अभियान प्रारंभ किया है। इसके तहत करोड़ों लोगों को मानक उपचार, निःशुल्क जांच तथा आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिला अस्पतालों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से मुफ्त ब्लड प्रेशर जांच एवं उपचार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
इस अवसर पर डॉ० शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने कहा “हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जो बिना चेतावनी के जानलेवा रूप ले सकती है। नियमित ब्लड प्रेशर जांच, संतुलित आहार, कम नमक का सेवन, प्रतिदिन व्यायाम एवं तनाव नियंत्रण जैसी आदतें लाखों लोगों का जीवन बचा सकती हैं। जनजागरूकता ही इस साइलेंट किलर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि 30 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच अवश्य करवानी चाहिए। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट टहलना, वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी और संतुलित जीवनशैली अपनाना हाइपरटेंशन के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर संदेश स्पष्ट है —
“अपना ब्लड प्रेशर जानें, उसे नियंत्रित रखें और अपने हृदय की सुरक्षा करें।”











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