खाड़ी देश बहरीन में भारतीय योग का डंका बज रहे हैं – योगाचार्य रितेश

काशी की माटी से मिले सनातनी ज्ञान को विश्व में रहे बाट

 

वाराणसी। महामना मदन मोहन मालवीय जी की जन्मस्थली प्रयागराज में जन्मे अन्तरराष्ट्रीय योगाचार्य रितेश दुबे मात्र पंद्रह वर्ष की आयु में वृन्दावन से अपनी योग यात्रा का प्रारम्भ किया। वर्ष 2015 में काशी आगमन के पश्चात् उन्हें वहाँ के महान आचार्यों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिसने उनकी साधना एवं आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा प्रदान की। प्रारम्भिक काल में धर्म संघ शिक्षा मण्डल में रहकर सेवा-सुश्रूषा के साथ संस्कृत की पूर्वमध्यमा परीक्षाओं का स्वाध्याय किया।बचपन से ही योग एवं अध्यात्म के प्रति विशेष रुचि रखने वाले रितेश दुबे को पूज्य शास्त्रार्थ महारथी काशीरत्न वाचस्पति डॉ. दिव्यचेतन ब्रह्मचारी जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनके मार्गदर्शन तथा अन्तरराष्ट्रीय योग गुरु डॉ. राकेश पाण्डेय जी के निर्देशन में हठयोग की पारम्परिक क्रियाओं का गहन अभ्यास प्रारम्भ हुआ।

उन्होंने सर्वप्रथम श्री स्वामी नारायणानन्दतीर्थ वेद विद्यालय में निःशुल्क योग प्रशिक्षण देकर समाज सेवा का कार्य प्रारम्भ किया। तत्पश्चात् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वसन्त कन्या महाविद्यालय, विक्रम विश्वविद्यालय तथा राजस्थान आदि प्रदेशों के प्रसिद्ध विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में योग प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और व्याख्यानों के माध्यम से पारम्परिक योग का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। वर्ष 2025 के प्रारम्भ में उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर योग के प्रचार हेतु अरब की खाड़ी स्थित Bahrain में पारम्परिक योग प्रशिक्षण प्रदान किया।

वर्तमान में वे France, United States, China सहित विभिन्न देशों के योग साधकों को पारम्परिक योग, प्राणायाम एवं भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। योगाचार्य रीतेश आचार्य पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से खाड़ी देशों में भारतीय योग परम्परा, संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु कार्य कर रहे हैं।

बहरीन देश में सर्वप्रथम नवभारत इण्टरनैशनल संस्थान में योग प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं तथा विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को योग, प्राणायाम, संस्कृत एवं भारतीय जीवनशैली से जोड़ने का कार्य किया। रीतेश जी ने कहा की मेरा उद्देश्य योग, संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य, संस्कार, संतुलन एवं आध्यात्मिक जीवन मूल्यों से जोड़ना है

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