ए आई टूल्स शिक्षण के क्षेत्र में सहायक हो रहा है

वाराणसी । अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “इंटीग्रेटिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन लाइफ साइंसेज़ टीचिंग एंड लर्निंग” विषय पर पाँच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, वाराणसी के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।

कार्यशाला के तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. सुधांशु कुमार झा, सहायक प्राध्यापक, इलाहबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज, ने “ए.आई. टूल्स फॉर टीचिंग कोर लाइफ साइंसेज कॉन्सेप्ट्स” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में, लाइफ साइंसेज की जटिल और सूक्ष्म अवधारणाओं को समझाने के लिए एआई टूल्स एक क्रांतिकारी माध्यम बन चुके हैं। एआई की मदद से शिक्षक अब हर छात्र की सीखने की क्षमता के अनुसार व्यक्तिगत पाठ्य-सामग्री तैयार कर पा रहे हैं, जिससे कठिन से कठिन वैज्ञानिक सिद्धांत भी बेहद सरल हो गए हैं। यह तकनीक न केवल शिक्षकों का समय बचा रही है, बल्कि विज्ञान की शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, सटीक और इंटरैक्टिव बनाकर क्लासरूम का भविष्य बदल रही है।

द्वितीय सत्र में डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी, ने “ए.आई.-असिस्टेड असेसमेंट एंड फीडबैक स्पेसिफिक टू साइंसेज” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि विज्ञान के क्षेत्र में सहायता प्राप्त मूल्यांकन और प्रतिक्रिया पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव ला रही है, यह आधुनिक तकनीक छात्रों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्क करने की क्षमता और प्रयोगात्मक कौशल का गहराई से विश्लेषण करती है। यह रियल-टाइम फीडबैक छात्रों की गलत अवधारणाओं को परीक्षा से पहले ही सुधारने में मदद करता है। अंततः यह तकनीक शिक्षकों को एक स्पष्ट डेटा प्रदान करती है कि क्लास के अधिकांश बच्चे किस वैज्ञानिक टॉपिक में कमजोर हैं, जिससे वे अपनी शिक्षण रणनीति को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। इस कार्यशाला की संयोजिका डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी हैं ।

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