भक्ति में शर्त नहीं होती, भक्ति का नाम समर्पण है

रिपोर्ट :-अनुपम भट्टाचार्य 

 

वाराणसी।भक्ति संसार कर रहा है,लेकिन शर्तों पर, एक अरदास करता है ज्योंही पूरा होता है दूसरा कर देता है। अगर कोई अरदास पूरी ना हो तो भक्ति भी छोड़ देता है। जब तक मन में कामनाएं रहती हैं भक्ति हो ही नहीं सकती है, अगर भक्ति करनी है तो पूर्ण समर्पण करना होगा। फिर जो मिला उसे परमात्मा का आशीर्वाद मानकर जीवन सुकून से जीना ही सही मायने में भक्ति है।

उक्त उदगार मलदहिया सत्संग भवन पर अयोजित जोन स्तरीय विशाल महिला समागम को सम्बोधित करते हुए दिल्ली से पधारी केन्द्रीय प्रचारिका आदरणीयाँ बहन निर्मल मनचंदा जी ने व्यक्त किया।

उन्होेंने कहा कि भक्ति से रिश्तों में प्यार बढ़ता है और रिश्ते मजबूत होते हैं। फिर हर एक रिश्ता प्यारा लगने लगता है। बहन जी ने कहा कि प्यार ऐसा करो कि माँ से बच्चे कहें कि ऐसी दूसरी माँ नहीं हो सकती, बहन ऐसी बने कि भाई कहें कि ऐसी दूसरी बहन नहीं हो सकती, पत्नी ऐसी बने कि पति कहे कि ऐसी पत्नी दूसरी नहीं हो सकती। प्यार ही ऐसा है जो संसार को एक कर सकता है इसलिए आज संसार को प्यार की ही जरूरत है यह प्यार केवल भक्ति से ही प्राप्त हो सकती है।

अंत में बहन जी ने कहा कि आज सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हर एक को ब्रह्म ज्ञान से जोड़कर एक परमपिता परमात्मा की भक्ति करना बता रही हैं, अगर एक ही कि भक्ति करेंगे तभी हमारे मनो में एकता का भाव प्रकट होगा फिर परिवार एक होंगे और समाज एक होगा। जिससे संसार में सुख और शांति आएगी।

समागम में बहनों ने अपने गीतों, विचारों एवं कविताओं के द्वारा संत निरंकारी मिशन के शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया।

समागम मे आये हुए भक्तों का आभार वाराणसी जोन के ज़ोनल इंचार्ज श्री सिद्धार्थ शंकर सिंह जी ने व्यक्त किया।

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