वाराणसी।वर्तमान समय में जनपद वाराणसी सहित सम्पूर्ण क्षेत्र में भीषण गर्मी एवं हीट वेव की स्थिति बनी हुई है तथा तापमान लगभग 43 से 45 डिग्री सेल्सियस के मध्य बना हुआ है। ऐसी विषम परिस्थितियों के बावजूद बाबा श्री काशी विश्वनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था निरंतर बनी हुई है तथा प्रतिदिन औसतन लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन हेतु पधार रहे हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा धाम परिसर में व्यापक एवं विशेष व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं।
मंदिर न्यास द्वारा निर्धारित एसओपी के अंतर्गत धाम परिसर के विभिन्न स्थलों पर शुद्ध आर०ओ० वाटर कूलर स्थापित किए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को शीतल पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। जिन स्थानों पर वाटर कूलर उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ बड़े मटकों में ठंडे जल की व्यवस्था की गई है तथा मंदिर कर्मियों द्वारा निरंतर श्रद्धालुओं को गिलासों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर ओआरएस घोल एवं ग्लूकोज की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे दर्शनार्थियों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके।
श्रद्धालुओं के पैरों को गर्म फर्श से सुरक्षित रखने हेतु सम्पूर्ण धाम परिसर में उच्च गुणवत्ता की जूट मैट बिछाई गई है। दर्शन पथ पर पर्याप्त छाया उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जर्मन हैंगर एवं टेंसाइल स्ट्रक्चर लगाए गए हैं तथा वातावरण की तपन कम करने एवं श्रद्धालुओं को शीतलता प्रदान करने के लिए मिस्ट फैन भी स्थापित किए गए हैं।
किसी भी आपात अथवा विषम परिस्थिति से निपटने हेतु मंदिर न्यास द्वारा, आरोग्य केंद्र, एंबुलेंस एवं प्रशिक्षित कर्मियों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
यदि किसी श्रद्धालु की तबीयत खराब होती है तो उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराते हुए अस्पताल पहुँचाकर उपचार कराया जा रहा है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास श्रद्धालुओं से अपील करता है कि वे अत्यधिक गर्मी वाले दोपहर के समय दर्शन हेतु आने से यथासंभव बचें तथा घर से भोजन एवं पर्याप्त जल ग्रहण कर ही यात्रा प्रारम्भ करें। वृद्ध, अशक्त एवं अस्वस्थ व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास समस्त श्रद्धालुओं के सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित दर्शन हेतु पूर्णतः कृतसंकल्पित है।
II श्री काशीविश्वनाथो विजयतेतराम II











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