छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन में ज्यादा समय दे सकते हैं

वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “इंटीग्रेटिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन लाइफ साइंसेज़ टीचिंग एंड लर्निंग” विषय पर पाँच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, वाराणसी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है।

कार्यशाला के चौथे दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. आनंद के. ठाकुर, सहायक प्राध्यापक, रांची विश्वविद्यालय, रांची ने “करिकुलम डिज़ाइन यूज़िंग ए.आई. ” विषय पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पाठ्यक्रम निर्माण में ए.आई की मदद से अब छात्रों की व्यक्तिगत क्षमताओं, सीखने की गति और भविष्य की वैश्विक जरूरतों को ध्यान में रखकर सिलेबस तैयार किया जा रहा है। यह तकनीक न केवल शिक्षकों का समय बचाती है, बल्कि डेटा का सटीक विश्लेषण करके हर बच्चे के लिए पढ़ाई को और अधिक रोचक व व्यावहारिक बनाती है। शिक्षा क्षेत्र में हो रहा यह आधुनिक बदलाव आने वाले समय में देश के छात्रों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

अपने द्वितीय सत्र में उन्होंने “ए.आई.-एनेबल्ड लेसन प्लानिंग एंड केस स्टडीज़ ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक शिक्षा में ए.आई. केवल समय बचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत शिक्षण का बुनियादी ढांचा बन चुका है। मैजिकस्कूल, डिफिट और एडुएड जैसे विशेष प्लेटफॉर्मों की मदद से शिक्षकों को अब शून्य से शुरुआत नहीं करनी पड़ती। घंटों बैठकर फॉर्मेट बनाने और मानकों को मिलाने के बजाय, शिक्षक तुरंत एक बुनियादी ढांचा तैयार कर सकतें हैं और अपना पूरा ध्यान छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देने में लगा सकते हैं।

इस पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। इस कार्यशाला की संयोजिका डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी हैं ।

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