
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “इंटीग्रेटिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन लाइफ साइंसेज़ टीचिंग एंड लर्निंग” विषय पर पाँच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यक्रम प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई, वाराणसी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है ।
कार्यशाला के पाँचवें दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. राज सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी, ने “एथिक्स एंड चैलेंजेस ऑफ एआई इन साइंस एजुकेशन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा को आधुनिक बनाने में सहायक है, लेकिन इसके प्रयोग में सावधानी आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि ए.आई. का उपयोग करते समय छात्रों की गोपनीयता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चर्चा में यह भी सामने आया कि शिक्षकों को तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना होगा। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस विषय पर गहन विचार-विमर्श किया।
समापन सत्र में डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने कार्यक्रम के दौरान अर्जित ज्ञान एवं अनुभवों को कक्षा-कक्ष में प्रभावी रूप से लागू करने की संभावनाओं तथा उसके भावी दिशाओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कार्यक्रम की समग्र गतिविधियों एवं प्रमुख निष्कर्षों का प्रस्तुतीकरण किया तथा प्रतिभागियों से उनके अनुभवों, सीख एवं चिंतन साझा करवाए।
इस पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। इस कार्यशाला की संयोजिका डॉ. कुशाग्री सिंह, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी रही ।










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