वाराणसी।परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने गुरुवार को श्रीविद्यामठ में आयोजित एक समारोह में गौप्रहरी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया।

ज्ञातव्य है कि गौ माता को राष्ट्रमाता एवं राज्यमाता का दर्जा दिलाने सहित भारत से गोकशी बंद कराकर गौमाता के संरक्षण हेतु जनजागरण करने के उद्देश्य से श्रीगुरुकुलम न्यास द्वारा गौ प्रहरी प्रतियोगिता का वाराणसी जिले के विद्यालयों में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।इस प्रतियोगिता में कक्षा 3 से लेकर कक्षा 12 तक के छात्र एवं छात्राएँ सम्मिलित हुए थे।इस प्रतियोगिता में सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुए शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गौमाता को एक पशु के रूप में नही बल्कि धर्म,संस्कृति और सृष्टि की पोषिका व आधारशिला के रूप में देखा गया है।

वैदिक परम्परा से लेकर आधुनिक समय तक गौमाता भारतीय समाज,अर्थव्यवस्था,

पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्र रही हैं।भगवान् श्रीराम और श्रीकृष्ण के जन्म के मूल में गौमाता ही रही हैं।गौमाता की महिमा केवल धार्मिक ग्रन्थों तक ही सीमित नहीं है अपितु उनका संरक्षण सम्पूर्ण मानवता और सृष्टि के कल्याण से जुड़ा है।अगर देखा जाय तो भारत की आजादी के आन्दोलन का सूत्रपात गौ माता के संरक्षण और उनके प्रति सम्मान की भावना के कारण हुआ।

हम सनातनियों का दुर्भाग्य ही है कि आजादी मिलने के बाद भी किसी सरकार ने सनातनियों की भावना का सम्मान नहीं किया।आज बहुसंख्यक सनातनियों के देश में उनकी ही गौ माता की हत्या हो रहा है।आज हमारा देश गौ मांस निर्यात में विश्व में दूसरे नम्बर से पहले नंबर की ओर अग्रसर हो चुका हैं।आज की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने भी हमें हमारे धर्म और संस्कृति से दूर कर दिया।हमें गौमाता के महत्व के बारे में केवल उनके आर्थिक लाभ तक पढ़ाया जाता है और उन्हें उपयोगी पालतू पशु ही बताया जाता है।हमारा उद्देश्य गाय को पशु नहीं माता के रूप में सम्मान मिले: इसे सुनिश्चित कराना है।इस सनातनी देश में हमारी गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान मिलना चाहिए।

मुझे आशा है कि संस्था द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता छात्र-छात्राओं में सनातनधर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रति एक समझ विकसित करने में सहायक होगी।यह प्रतियोगिता केवल ज्ञान की परीक्षा ही नहीं,अपितु गौसेवा और सनातन संस्कृति के प्रति एक सजीव आन्दोलन सिद्ध होगा।ऐसी अन्य संस्थाओं को सनातन संस्कृत के संरक्षण हेतु आगे आना चाहिए।

श्री गुरुकुलम के अध्यक्ष अभय शंकर तिवारी ने कहा कि इस प्रतियोगिता के द्वारा हम अपने परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती जी महाराज के गौ प्रतिष्ठा आन्दोलन का समर्थन कर रहे हैं।एवं उनके भगीरथ प्रयास में हमारा मात्र यह एक गिलहरी प्रयास है।इस प्रतियोगिता के माध्यम से हम गौ माता महत्व के संदर्भ में लोगों में समझ विकसित करने का प्रयास करेंगे।

कार्यक्रम का संचालन अनिल कुमार जी ने किया। कार्यक्रम में प्रतियोगिता के समन्वयक विक्रम त्रिवेदी ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से से श्रीमठ के उत्तराधिकारी राघव दास जी महाराज,परमात्मानन्द जी महाराज, त्रिभुवन जी, बृजेश सेठ, अभिषेक सिंह, सोनू मौर्या,श्रेया श्रीवास्तव, विक्रम त्रिवेदी,उपेंद्र चौधरी,अम्बरीष कुमार राय,ब्रह्मानंद शुक्ल आदि लोग सम्मिलित थे।

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