
वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” का 1924वां दिवस संपन्न हुआ। डा. मनोहर लाल ने कहा कि प्रेमचंद की कहानी ‘सती’ केवल सामाजिक कथा नहीं, बल्कि मानव मन के अंधेरे कोनों को उजागर करने वाली मनोवैज्ञानिक मास्टरपीस है। उन्होंने कहा कि यह रचना स्त्री-पुरुष संबंधों को नए और मानवीय दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम में प्रेमचंद की कहानी ‘स्वामिनी’ का पाठ सरिता वर्मा ने किया। संतोष प्रीत ने कहा कि प्रेमचंद हमेशा से स्त्री अधिकारों के समर्थक रहे हैं और उनकी कहानियां स्त्री चेतना को मुखर करती हैं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर बुद्ध देव तिवारी ने काव्यपाठ प्रस्तुत किया। संचालन आयुषी दूबे ने किया।










Leave a Reply