एआई का सकारात्मक व रचनात्मक उपयोग शिक्षा,शोध, समाज के विकास में योगदान दे सकता है

अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र में छः दिवसीय कार्यशाला शुरू 

 

 

वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “फ्रॉम डेटा टू इनसाइट्स: स्टैटिस्टिकल एनालिसिस विद फ्री एंड एआई-ड्रिवन टूल्स” विषय पर छह दिवसीय शॉर्ट टर्म कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजा पाठक, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसी क्रम में एक ग्लिम्प्सेस प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई, जिसमें आईयूसीटीई की 11 वर्षों की विकास यात्रा को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. रामाशंकर दूबे, कुलाधिपति, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा), नई दिल्ली तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. गौरव सिंह, सीआईईटी, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने की।

प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान), आईयूसीटीई ने अतिथियों का स्वागत किया तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री सी. डी. राणा, डेप्युटी लाइब्रेरियन, आईयूसीटीई द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने किया।

मुख्य अतिथि प्रो. रामाशंकर दूबे, कुलाधिपति, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा), नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सदैव समाज की आवश्यकताओं एवं बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उत्तरदायी होना चाहिए। उन्होंने बल देते हुए कहा कि शिक्षकों एवं संकाय सदस्यों को इस प्रकार सशक्त बनाया जाना आवश्यक है कि वे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की दक्षताओं एवं प्रतिस्पर्धात्मक क्षमताओं से युक्त कर सकें। उन्होंने कहा कि गणित प्राचीन काल से ही भारतीय समाज एवं ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग रहा है। समय-समय पर विश्व ने अनेक तकनीकी परिवर्तनों को देखा है और वर्तमान युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा आँकड़ा-आधारित तकनीकों का युग है। ऐसे में शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अन्य आधुनिक डिजिटल उपकरणों का प्रभावी उपयोग करते हुए आँकड़ों को समझने, उनका विश्लेषण करने तथा उनसे सार्थक निष्कर्ष निकालने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

प्रो. गौरव सिंह, सीआईईटी, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली ने अपने वक्तव्य में शिक्षा के क्षेत्र में आँकड़ों की समझ एवं उनके विश्लेषण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आँकड़ा-आधारित निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को आधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से आँकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता विकसित करने पर बल दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली तकनीक है, जिसका उपयोग अत्यंत जिम्मेदारी, नैतिकता एवं सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई का सकारात्मक एवं रचनात्मक उपयोग शिक्षा, शोध तथा समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

द्वितीय सत्र में प्रो. गौरव सिंह ने “रोल ऑफ डेटा, स्टैटिस्टिक्स एंड एआई इन रिसर्च: टाइप्स ऑफ डेटा एंड लेवल्स ऑफ मेज़रमेंट (मैपिंग रिसर्च क्वेश्चन्स टू टाइप ऑफ एनालिसिस)” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध कार्य में डेटा, सांख्यिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका तथा विभिन्न प्रकार के डेटा एवं विश्लेषण की उपयुक्त विधियों पर विस्तार से चर्चा की। तृतीय सत्र में उन्होंने “मेजर्स ऑफ सेंट्रल टेंडेंसी एंड डिस्पर्शन; ग्राफ्स एंड विजुअलाइजेशन्स” विषय पर प्रतिभागियों को विभिन्न सांख्यिकीय मापों, डेटा के प्रसार तथा ग्राफ एवं दृश्यात्मक प्रस्तुतिकरण की तकनीकों से अवगत कराया। चतुर्थ सत्र में “ग्रुप डिस्कशन फॉर फ्रेमिंग रिसर्च क्वेश्चन्स एंड ऑब्जेक्टिव्स” विषय पर समूह चर्चा का आयोजन किया गया।

इस सत्र में प्रतिभागियों ने शोध प्रश्नों एवं शोध उद्देश्यों के निर्माण की प्रक्रिया को समझा तथा विभिन्न शोध विषयों के संदर्भ में प्रभावी एवं स्पष्ट रिसर्च क्वेश्चन्स तैयार करने पर विचार-विमर्श किया।

इस छह दिवसीय कार्यक्रम में महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 37 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। संकाय सदस्यों सहित केंद्र के सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई तथा सह-संयोजन श्री सी. डी. राणा, डेप्युटी लाइब्रेरियन, आईयूसीटीई कर रहे हैं।

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