
IIननद जी की शादी रचाओ II
(लचारी धुन)
बात मान लो हमारी प्यारी अम्मा I
ननद जी की शादी रचाओ II
सुबह उठें लेकर मोबाइल अपने हाथ में,
दो-चार लड़के चाय पियें रोज साथ में I
पास बैठा कर प्रेम से समझाओ,
ननद जी की शादी रचाओ II1II
कभी छत पर बैठइं कभी खेत और खलिहाने,
शहर जाके पिक्चर देखें स्कूल के बहाने I
देवर, जेठ और जेठानी को बताओ,
ननद जी की शादी रचाओ II2II
तीस साल हुआ कब तक होगी पढ़ाई,
शादी के नाम पर सबसे करें लड़ाई I
चोरी से मोबाइल चलाना अब छुड़ाओ,
ननद जी की शादी रचाओ II3II
शिक्षा,संस्कार -अदब परिवार में जब रहिहैं,
नाक नाहीं कटे,फांसी माई-बाबू न लगइहैं I
घर से भागे नहीं मुनिया को बचाओ,
ननद जी की शादी रचाओ II4II
बात मान लो हमारी प्यारी अम्मा I
ननद जी की शादी रचाओ II
कवि इंजी. राम नरेश “नरेश”
सिंगरौली (म.प्र)












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