
मध्यप्रदेश। सिंगरौली में चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) द्वारा रविवार को नरेश निवास बलियरी, बैढ़न में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह का संयोजन सिंगरौली इकाई प्रभारी सह अध्यक्ष कवि श्री प्रविन्दु दूबे चंचल ने किया I
समारोह के मुख्य अतिथि नारायण इंटर नेशनल प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री जगत नारायण चौरसिया, विशिष्ट अतिथि इंजीनियर राम नरेश “नरेश” तथा अध्यक्षता मनोहर लाल वर्मा किया।
समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन,माँ सरस्वती और स्मृतिशेष चंद्रावती नरेश के चित्र पर पुष्प अर्पित कर हुआ।सुश्री विभा तिवारी ने सरस्वती वंदना की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश “नरेश” और संस्था के सिंगरौली इकाई प्रभारी सह अध्यक्ष कवि श्री प्रविन्दु दूबे चंचल ने मुख्य अतिथि सहित उपस्थित कवियों/कवयित्रियों को अंगवस्त्र,स्मृति चिन्ह और “मड़ये की हरदी” पुस्तक देकर सम्मानित किया I
मुख्य अतिथि नारायण इंटर नेशनल प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री जगत नारायण चौरसिया जी चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) से सम्मानित होने वाले सभी 21 कवियों को बधाई देते हुए कहा कि,चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) ने छोटे -बड़े साहित्यकारों को जो एक सम्मानित साहित्यिक मंच दिया है, इस पुनीत साहित्य सेवा के लिए हम राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश “नरेश” को हम बहुत-बहुत बधाई और शुभ कामनाएं देते हैं I
मध्य प्रदेश जिला सिंगरौली के प्रभारी /अध्यक्ष श्री प्रविंदु दूबे चंचल ने कहा कि, लोक भाषा, संस्कृति और भोजपुरी गीत परम्परा को आगे बढ़ाने में भोजपुरी साहित्य लेखकों एवं कवियों के बीच कवि नरेश जी अपने को आज लोक कवि के रूप में प्रतिष्ठापित कर चुके हैं I
अध्यक्ष मनोहर लाल वर्मा ने कहा कि मड़ये की हरदी- गीत संग्रह,भोजपुरी के पारंपरिक लोक गीतों की अनमोल धरोहर है I
काव्य गोष्ठी की शुरुआत राम खेलावन मिश्रा की रचना- गाँव की धरती कितनी सुंदर ,कितने सुंदर लोग गीत से हुआ I उसके बाद क्रम से प्रवीण तिवारी- मैं उदास हूँ ,वो इतना जल्दी चली गई,सुश्री विभा तिवारी- लिखूँ गीत शौर्य का मैं जीवन को राग दूँ ,डॉ.हरि विलास गुप्त हरि – चाहता हूँ तुमको चाहूंगा बार- बार, अश्विनी कुमार श्रीवास्तव -आपस में मिलना रुहों का देखा सच्चा मेल है,प्रविन्दु दूबे चंचल – पास पहुँच कर बोला गंगा थोड़ा मुझको पानी दे दो,राम नरेश “नरेश” – चंदा कुछ पल तक रुक जाओ,श्रीमती कीर्ति अभिमन्यु पाठक – प्रेम जिससे करो पूरे मन से करो,आधे मन से करो तो करो ही नहीं, सागर गुप्ता – महावर, पैजनी, बिंदिया,मैं कंगन देख लेता हूँ, नारायण दास विकल- जिंदगी जिंदगी वो जिंदगी काटों का उपहार है जिंदगी ने काव्य संध्या को शीर्षस्थ बुलंदियों तक पहुंचाया I
मनोहर लाल वर्मा द्वारा अध्यक्षीय गरिमा के अनुरूप समीक्षा करते हुए सुंदर सी रचना पढ़कर- मैं तो आदिवासी भइया, सिंगरौली के रहइया से सबके तालियों को बटोर लिया I
राम मिलन उपाध्याय,के पी सोनी, सुरेंद्र प्रसाद शाह तथा उपस्थित अन्य कवियों ने शान दार काव्य पाठ किया
श्रीकमल शुक्ल “अज्ञान” द्वारा ग़ज़लों, छंदों और मुक्तकों द्वारा सफल संचालन ने इस शाम को और खूबसूरत बना दिया I
सिंगरौली,सीधी तथा सोनभद्र से आये सभी रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से इस काव्य गोष्ठी के ऐतिहासिक पल को अविस्मरणीय बताते हुए मड़ये की हरदी – भोजपुरी गीत संग्रह को भोजपुरी जगत की अनुपम कृति बताया,जो कवि नरेश जी को भोजपुरी साहित्य के लिए अमरत्व प्रदान करेगी I
राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश “नरेश” द्वारा इस भव्य सम्मान समारोह में आये कवियों और अतिथियों को धन्यवाद तथा आभार व्यक्त करने के बाद कार्य क्रम का समापन हुआ I











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