
वैश्विक परिवर्तनों के बीच भारत को अपना विकास पथ स्वयं तय करना होगा: -डॉ. कुमार
वाराणसी। विज्ञान भारती के सातवें अधिवेशन में नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि यह अधिवेशन भारत के विज्ञान के लिए पुनर्जागरण होगा। डॉ. कुमार शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में विज्ञान भारती के 7 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में अपना वक्तव्य दे रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की विकास यात्रा तथा समकालीन विश्व को प्रभावित कर रहे प्रमुख परिवर्तनों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत का भी उल्लेख करते हुए जगदीश चंद्र बोस, सी वी रमन, चंद्रशेखर, हरगोविन्द खुराना और शांति स्वरूप भटनागर के योगदानों को स्मरण किया।
भारत की स्वतंत्रता के बाद की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि देश के संस्थापकों ने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन को एक साथ आगे बढ़ाने की अनूठी चुनौती स्वीकार की थी। उन्होंने कहा कि पंचायती राज जैसी संस्थाओं के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र लगातार सशक्त हुआ है। साथ ही, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, साक्षरता और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में भारत की उल्लेखनीय प्रगति को भी रेखांकित किया
मध्यम-आय जाल से बचने की आवश्यकता पर बल देते हुए डॉ. कुमार ने “विकसित भारत” के लिए एक स्पष्ट और समावेशी दृष्टि की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचना चाहिए, विशेषकर आबादी के सबसे निचले 10 प्रतिशत हिस्से तक। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सामूहिक राष्ट्रीय प्रयासों से ही प्राप्त किया जा सकता है।
वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए डॉ. कुमार ने वर्तमान समय में चल रहे चार प्रमुख परिवर्तनों – भूराजनीतिक बदलाव, आर्थिक पुनर्संरचना, जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से प्रेरित तकनीकी क्रांति – की पहचान की। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के उभार और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित संस्थाओं की बढ़ती सीमाओं का उल्लेख करते हुए वर्तमान दौर को गहन वैश्विक परिवर्तन और मंथन का काल बताया।
जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विषय में बोलते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि भारत के सामने एक दोहरी चुनौती है-एक ओर कार्बन उत्सर्जन को कम करना और दूसरी ओर तीव्र आर्थिक विकास को बनाए रखना। उन्होंने “एशियन ब्राउन क्लाउड” से जुड़े हिमनदों (ग्लेशियरों) के पीछे हटने जैसी चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविकता है, जिसके लिए रणनीतिक कदम उठाना आवश्यक है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उन्होंने कहा कि AI का उद्देश्य मानव श्रम का स्थान लेना नहीं, बल्कि उसे सहयोग और पूरकता प्रदान करना होना चाहिए। उन्होंने AI के नैतिक पहलुओं पर भी अधिक गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई।
अपने व्याख्यान के समापन में डॉ. कुमार ने जोर देकर कहा कि भारत को अपने विकास की दिशा और समाधान अपनी परिस्थितियों, आवश्यकताओं और वास्तविकताओं के अनुरूप तैयार करने होंगे तथा विकास के लिए बाहरी या आयातित मॉडलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।












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