अभी ना जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं,,,पार्श्व गायिका आशा भोंसले के नाम समर्पित रहा दरबारीन महफ़िल

स्वरांगना ललित कला, अंजोरा, संगीत परिषद, रेडिशन के संयुक्त तत्वावधान में एक शाम आशा भोंसले के नाम दरबारी महफ़िल का सफल आयोजन

 

वाराणसी। स्वरांगना ललित कला केन्द्र, अंजोरा, संगीत परिषद काशी एवं रेडिशन होटल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सांयकाल एक शाम आशा भोंसले के नाम दरबारी महफ़िल का आयोजन रेडिशन होटल में किया गया।

इस साल का दरबारी महफ़िल पूरी तरह से महान पार्श्व गायिका आशा भोंसले को समर्पित रहा। मुंबई की टीम अल्फ़ाज और आवाज़ के कलाकारों सुदीप बनर्जी, ज्ञानिता दिवेदी और आरोह शंकर ने आशा भोंसले के गाये गीतों को पेश कर हर किसी को झूमने को बाध्य कर दिया। उनके साथ संगत कलाकारों में गिटार पर सुशांत शर्मा, तबला पर हितेश प्रसाद, सिंथेसाइजर पर अनय गॉडगिल, हैंडसोनिक पर मनोज मोहिते ने सुमधुर एवं ज़ोरदार संगत कर समा बांध दिया।

कार्यक्रम में ज्ञानिता दिवेदी एवं आरोह शंकर आशा भोंसले के कई गीतों की मनमोहक प्रस्तुति की। इनमें प्रमुख रूप से इशारों इशारों में दिल देने वाले, तेरे ख्यालों में हम तेरी बाहों में हम, आइए मेहरबा बैठिए जाने जा, जब हम सिमट के आपकी बाहों में आ गए, आगे भी जाने न तू पीछे भी जाने न तू, मांग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार, अभी ना जाओ छोड़ कर की दिल अभी भरा नहीं, जाइये आप कहा जायेंगे, निगाहें मिलाने को जी चाहता है, जिंदगी इत्तेफाक है, जब छाये मेरा जादू तो कोई बच न पाए आदि रहा। सूत्रधार अजय पाण्डेय सहाब रहे। जबकि सुदीप बनर्जी ने अपने सुमधुर स्वर एवं गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उन्होंने तस्वीर बनाता हूं तस्वीर नहीं बनती, फिर वही शाम वही ग़म वही तन्हाई है, सीने में सुलगते अरमा, जिंदगी देने वाले सुन तेरी दुनिया से जी भर गया एवं मेरी याद में तुम ना आंसू।

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