विश्वविद्यालय के तीरन्दाजी, भाषण एवं काव्य लेखन प्रतियोगिताओं में अक्षत, विपुल, व आनन्द ने किया शानदार प्रदर्शन

वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के 44वें दीक्षान्त महोत्सव की श्रृंखला में माननीय कुलाधिपति एवं विश्वविद्यालय के निर्देशों के अनुपालन में बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में परम्परागत खेल प्रतियोगिता तथा काव्य लेखन एवं भाषण प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया।

प्रतियोगिताओं का उद्देश्य विद्यार्थियों के बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, रचनात्मक अभिव्यक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना का विकास करना था।

अपने संदेश में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020” का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र, कौशल और नेतृत्व का विकास करना है। भारतीय ज्ञान परम्परा में साहित्य, संस्कृति एवं परम्परागत खेल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के सशक्त माध्यम हैं। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ऐसी प्रतियोगिताएँ युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

परम्परागत खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत आयोजित तीरन्दाजी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट खेल भावना एवं अनुशासन का परिचय दिया।

दलीय इण्डियन राउण्ड में निहाल चौहान, अंकित निषाद एवं महेश पटेल की टीम विजेता रही, जबकि रिकर्व राउण्ड में अक्षत सिंह, सर्वेश कुमार एवं वर्षा जाटराणा की टीम उपविजेता रही।

व्यक्तिगत नॉकआउट तीरन्दाजी स्पर्धा में अक्षत सिंह ने प्रथम, सर्वेश कुमार ने द्वितीय तथा निहाल चौहान ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इसके उपरांत आयोजित भाषण एवं काव्य लेखन प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

भाषण प्रतियोगिता में विपुल पाण्डेय प्रथम, वर्षा जाटराणा द्वितीय तथा रुद्रांश सिंह तृतीय स्थान पर रहे। वहीं काव्य लेखन प्रतियोगिता में आनन्द कुमार झा ने प्रथम तथा शौर्या सिंह ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान की गईं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा, साहित्य, संस्कृति एवं खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के सशक्त आधार हैं। ऐसे आयोजन उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमिता ने किया। अंत में डॉ रविशंकर पाण्डेय एवं डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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