जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए – अभिराम दास जी महाराज

 

श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन 

 

 

वाराणसी। राजघाट ,भदऊ चुंगी स्थित श्री साईं धाम अपार्टमेंट वेंसमेंट में श्री काशी विश्वनाथ भगवान के तत्वावधान में आयोजित 6 अगस्त से 12 अगस्त 2026 तक श्रीमद्भागवत कथा रस महोत्सव का रविवार को चौथा दिन रहा।

 

श्रीमद्भागवत कथा शुरु होने से पहले मुख्य यजमान प्रदीप मिश्रा ने पोथी की विधिवत पूजा अर्चना एवं कथावाचक अभिराम दास जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

उपस्थित भक्तों को वृंदावन धाम से पधारे श्री अभिराम दास जी महाराज ने ध्रुव चरित्र के माध्यम से बताया ध्रुव जी महाराज ने भगवान की कृपा से पृथ्वी पर 36000 वर्ष तक राज्य किया एवं अंत में भगवान के धाम को प्राप्त हुए और आज भी अटल है।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी पर एक ऐसे राजा पृथु जी महाराज हुए जिन्होंने बड़े-बड़े यज्ञ, अनुष्ठान, संत ब्राह्मण सेवा को किया। जगत कल्याण हेतु सर्वश्रेष्ठ राजा की प्राप्ति पृथु जी महाराज के रूप में हुई।

श्रीमद्भागवत कथावाचक ने भक्तों को पुरंजन अभिज्ञात उपाख्यान कथा के माध्यम से बताया यह पुरंजन जीवात्मा है अभीज्ञात परमात्मा है बस यह जीवात्मा परमात्मा का घर भूल गई कोई सद्गुरु की कृपा से ही तत्व ज्ञान की प्राप्ति होती है।

अजामिल उपाख्यान के माध्यम से बताया किस तरह दुष्ट अजामिल को जो पाप करने में लिप्त हो गया था भगवान के नाम पर संतो के कहने पर पुत्र का नाम नारायण रखा अंत में अजामिल को मोक्ष प्राप्त हुआ।

अतः हम सभी को भी अपने बच्चों के नाम भगवान के नाम पर रखना चाहिए जिससे अंत समय में कम से कम भगवान का नाम निकले।

नरसिंह भगवान का पावन चरित्र, भगवान ने तीन पग में संपूर्ण पृथ्वी को नाप कर राजाबली के अहंकार को तोड़ा, अतः है जीवन में अहंकार कभी नहीं करना चाहिए।

आगे की पावन प्रसंग को सुनते हुए राम जन्म एवं श्री कृष्ण जन्म की अद्भुत कथा का व्याख्यान किया बताया गया भगवान धर्म की स्थापना के लिए ही पृथ्वी पर जब पाप अधिक बढ़ जाता है तब भगवान को भारत भूमि पर अवतार लेकर आना पड़ता है चतुर्थ दिवस धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया।

ज्ञातव्य हो कि श्रीमद्भागवत 12 अगस्त तक सांय काल 3 बजे से उपस्थित भक्तगण को महराज जी कथा श्रवण करायेंगे।

कथा के उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया।

श्रीमद्भागवत कथा श्रवण में सर्वश्री

डॉली मिश्रा,प्रदीप कुमार मिश्र, पूजा मिश्रा,रीता मिश्रा, रुद्र मिश्र,

सिद्धान्त मिश्र,सचिन मिश्र, मुकुन्द लाल शर्मा,मयंक शर्मा, शुचि शर्मा,

आशीष मिश्रा,रिया मिश्रा सहित अनेक श्रोता गण शामिल रहे।

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