‘भूत’ कहानी के ज़रिए ने उकेरा अंतरात्मा का द्वंद्व:- शुभा श्रीवास्तव

​वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही द्वारा आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 2056वें दिवस पर रविवार को मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘भूत’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि से हुई, जिसके बाद बीना अग्रवाल ने कहानी का सजीव पाठ किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के निदेशक राजीव गोंड व शुभा श्रीवास्तव ने बीना अग्रवाल को सम्मानित किया। ​कहानी की समीक्षा करते हुए शुभा श्रीवास्तव ने कहा कि यह केवल भूत-प्रेत की कथा नहीं है, बल्कि वासना, सामाजिक मर्यादा, स्त्री की विवशता और अंतरात्मा की आवाज को दर्शाती एक मनोवैज्ञानिक रचना है। मनोहर लाल ने कहा कि कहानी की मुख्य विशेषता अपराध-बोध का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण है। संचालन आयुषी दूबे और स्वागत रामजतन पाल ने किया। इस दौरान नमन श्रीवास्तव, आलोक श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, समीक्षा त्रिपाठी, विवेक त्रिपाठी, विवेक विश्वकर्मा आदि थे

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