
वाराणसी। काशी की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान परंपरा और आधुनिक विकास यात्रा को एक दृश्य कथा के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (एसआईआरडी), वाराणसी द्वारा लघु डॉक्यूमेंट्री तैयार की जा रही है। प्रस्तावित डॉक्यूमेंट्री का शीर्षक “काशी : प्राचीन से आधुनिक तक” रखा गया है, जिसमें प्राचीन काशी से वर्ष 2014 और फिर आधुनिक काशी 2026 तक के परिवर्तन को दर्शाया जाएगा। डॉक्यूमेंट्री में काशी की यात्रा को तीन प्रमुख चरणों में प्रस्तुत किया जाएगा। पहले चरण में ऋग्वेद काल से 2014 तक की काशी की विरासत, आध्यात्मिक परंपरा, गंगा-घाट, साहित्य, संगीत, कला, शिल्प और सांस्कृतिक पहचान को शामिल किया जाएगा। दूसरे चरण में वर्ष 2014 को काशी के समकालीन विकास यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दिखाया जाएगा।आधुनिक काशी 2026 के चरण में विरासत संरक्षण के साथ विकास, पर्यटन, भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पाद, बौद्धिक संपदा, नवाचार, महिला उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों और कारीगरों की संभावनाओं को प्रमुखता दी जाएगी। इसमें बनारसी वस्त्र एवं ब्रोकेड, गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी और धातु शिल्प जैसी काशी की विशिष्ट पहचान को वैश्विक मंच से जोड़ने के प्रयासों को दर्शाया जाएगा।
संस्थान के निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि यह सीमित संसाधनों में किया जा रहा प्रयास है, जिसका उद्देश्य काशी की उस व्यापक कहानी को सामने लाना है, जहां अतीत की विरासत, वर्तमान का परिवर्तन और भविष्य की संभावनाएं एक साथ दिखाई दें। उन्होंने कहा कि काशी को समझना केवल उसके इतिहास को जानना नहीं, बल्कि उस निरंतर यात्रा को समझना है जिसमें हजारों वर्षों की परंपराएं आज भी भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। डॉक्यूमेंट्री वर्तमान में शोध, सामग्री संकलन और रचनात्मक तैयारी के चरण में है।

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