वैदिक मन्त्रोच्चार के बीच कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने सम्भाला कार्यभार, विद्यार्थी हित, शिक्षक नियुक्ति और लम्बित कार्यों का शीघ्र निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शनिवार को कुलपति कार्यालय में दूसरे कार्यकाल के लिए पुनः कुलपति पद का कार्यभार पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ग्रहण किया।

कार्यभार ग्रहण करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रतिष्ठित करने का संकल्प व्यक्त किया।

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि प्राच्य विद्या के इस प्राचीन केन्द्र के कुलपति के रूप में पुनः दायित्व मिलना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। महामहिम कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा उन पर पुनः व्यक्त किए गए विश्वास को वे विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक उत्तरदायित्व और विकास के संकल्प के रूप में स्वीकार करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस विश्वास को सार्थक करने के लिए कठोर अनुशासन, पारदर्शिता, समर्पण और निरन्तर कर्मशीलता के साथ कार्य किया जाएगा।

प्रो. शर्मा ने कहा कि काशी स्थित यह विश्वविद्यालय 235 वर्षों से देवभाषा संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा की अविरल धारा को आगे बढ़ा रहा है। यह केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि भारत की प्राच्य ज्ञान-संपदा का महत्वपूर्ण केन्द्र है। उनके दूसरे कार्यकाल में इस विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक अकादमिक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में प्रारंभ किए गए और शेष रह गए कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई योजनाओं और विकास कार्यों को स्पष्ट कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा की जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक ज्ञान, तकनीक और समकालीन प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को परम्परा के साथ आधुनिकता से जोड़ना उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उनकी शैक्षणिक एवं मूलभूत समस्याओं को समझकर समयबद्ध समाधान किया जा सके। पठन-पाठन की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थी-केन्द्रित बनाया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ पेयजल सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करना भी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान में अनेक शिक्षक एवं आचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिसके कारण अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस चुनौती का समाधान विधिक एवं निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत शिक्षकों की नियुक्ति के माध्यम से किया जाएगा। शिक्षक नियुक्ति को प्राथमिकता मिलने से न केवल नियमित पठन-पाठन को मजबूती मिलेगी, बल्कि शोध, प्रकाशन और अन्य अकादमिक गतिविधियों को भी गति प्राप्त होगी।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन राजभवन से प्राप्त प्रत्येक निर्देश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करेगा। विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को और मजबूत किया जाएगा तथा प्रत्येक कार्य को निर्धारित समयसीमा और नियमों के अनुरूप पूरा करने पर बल दिया जाएगा।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की विकास यात्रा सामूहिक प्रयासों से ही सफल होगी। शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी मिलकर इस प्राचीन ज्ञानपीठ को आधुनिक युग के अनुरूप सशक्त और प्रभावशाली ज्ञान-केन्द्र बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।

 

प्रो. शर्मा ने कहा कि उनका दूसरा कार्यकाल गौरवशाली परम्परा के संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों के हित, शिक्षक नियुक्ति, लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण और विश्वविद्यालय को नई अकादमिक ऊंचाइयों तक ले जाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा।

 

ज्ञातव्य है कि महामहिम कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा 17 अगस्त 2026 को प्रो. बिहारी लाल शर्मा को विश्वविद्यालय के 38 वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल हेतु नियुक्ति आदेश निर्गत किया गया। इससे पूर्व उन्होंने 22 अगस्त 2023 को 37वें कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। पुनर्नियुक्ति के उपरांत प्रो. शर्मा ने आज 22 अगस्त 2026 को 38वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल का कार्यभार ग्रहण किया।

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