गांवों तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने का सेतु है स्पिक मैके

वाराणसी/लखनऊ। भारत की सांस्कृतिक विरासत को शहरों से गांवों तक पहुंचाने और युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत व लोककलाओं से जोड़ने के लिए स्पिक मैके की प्रादेशिक बैठक रविवार को लखनऊ में हुई। करीब चार घंटे चली बैठक में संगठन के 2027 में 50 वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती वर्ष के आयोजन की तैयारियों पर चर्चा हुई।

चेयरपर्सन समरेंद्र प्रताप सिंह ने गांवों में सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े वालंटियर्स को संगठन से जोड़ने और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने विरासत एवं स्टेट कन्वेंशन के लिए 50-60 नए वालंटियर्स जोड़ने की बात कही। उपाध्यक्ष डॉ. शुभा सक्सेना ने विद्यालयों के सीएसआर फंड के उपयोग और अन्य स्रोतों से सहयोग जुटाने पर बल दिया। कोषाध्यक्ष डॉ. विभा सिंह ने संस्थापक प्रो. किरण सेठ के योगदान की जानकारी दी।

प्रदेश सचिव श्रेयश शुक्ला ने स्वर्ण जयंती पर वाराणसी या प्रयागराज में दो दिवसीय आयोजन की संभावना पर चर्चा की। लखनऊ चैप्टर समन्वयक डॉ. हेम चंद्र पालीवाल ने कहा कि स्पिक मैके युवाओं में संस्कार और सांस्कृतिक पहचान विकसित कर रहा है। बैठक में डॉ. आभा मिश्रा, पंकज सिंह, पवन सिंह, मेधना कश्यप, उपमेश उपाध्याय, रजनीश त्रिवेदी, प्रतिमा द्विवेदी, राघवेंद्र कुमार द्विवेदी, विकास मिश्रा, डॉ. अंकित श्रीवास्तव, दीपक ओबेराय और सूर्यांश सिंह मौजूद रहे।

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