पदम् भूषण पंडित पट्टाभिराम शास्त्री जी की 34 वीं पुण्य तिथि मनाई गई

 

वाराणसी। हनुमान घाट स्थित वेदमीमांसा अनुसंधान केंद्र, में मंगलवार को पद्मभूषण श्री पट्टाभिराम शास्त्री जी की 34 वीं पुण्यतिथि एवं प्रो०युगल किशोर मिश्र जी की प्रथम पुण्यतिथि पर पुण्य स्मरण समारोह एवं वेद विद्यार्थी सम्मेलन का आयोजन केंद्र के सभागार में हुआ ।

इस अवसर पर केंद्र में अध्ययन कर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में प्राध्यापक पद को सुशोभित कर रहे एक सौ से अधिक पूर्व छात्र शामिल हुए ।

 

कार्यक्रम का आरम्भ पद्मभूषण पं०श्री पट्टाभिराम शास्त्री जी एवं प्रो० युगल किशोर मिश्र जी के चित्र पर पुष्पार्चन से हुआ।

मुख्य अतिथि प्रो०विनोद कुमार मिश्रा निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के वेदोच्चारण से प्रभावित होकर वैदिक अध्ययन को वैश्विक साहित्य के लिए आवश्यक बतलाया ।

प्रो० रामपूजन पांडेय जी ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य के कवियों ने ऋग्वेद की विश्वामित्र नदी संवाद और बृहदारण्यक के उपदेशों को उल्लिखित किया है।

कांची मठ के प्रबन्धक वी.एस.सुब्रह्मण्यम् ने संस्था की उपलब्धियां को रेखांकित करते हुए समाज के लिए वैदिक अध्ययन को आवश्यक बतलाया ।

अध्यक्षीय भाषण में प्रो बाल शास्त्री जी प्राक्तन संकाय प्रमुख – संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने वेदों में दम्पति शब्द की व्याख्या के सामाजिक वैशिष्ट्य को निरुपित किया ।

पूर्व कला संकाय प्रमुख प्रो किशोर मिश्र ने वैदिक उच्चारण परम्परा को विश्व की धरोहर के रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता बतलायी ।

अतिथियों का स्वागत डॉ अरुण कुमार मिश्र सह आचार्य संस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय ने किया ।धन्यवाद प्रकाशन प्रो०मनुलता शर्मा द्वारा किया गया।

सम्पूर्ण कार्यक्रम का संयोजन सहायक सचिव डॉ० गंगाधर मिश्र जी श्री पट्टाभिराम शास्त्री वेद मीमांसा अनुसंधान केन्द्र ने किया तथा संचालन मुमुक्षु भवन पी.जी.कालेज के डॉ शैलेन्द्र नाथ दीक्षित द्वारा किया गया।

समारोह में डॉ सर्वेशरमण तिवारी ( संस्कृत पी .जी .कॉलेज छपरा) डॉ विजय कुमार शर्मा (सं .सं.वि.वि.) डॉ दीपक कुमार शर्मा (डी०ए०वी० कॉलेज) डॉ पुष्पा त्रिपाठी ( आर्य महिला कॉलेज) प्रो चन्द्रकान्ता राय (आर्य महिला कॉलेज ) डॉ मंजू (वसन्ता कॉलेज )डॉ समता मिश्रा, डॉ त्रिपुर सुंदरी ,डॉ ज्योतिस्वरूप तिवारी, डॉ जयन्त पति त्रिपाठी, डॉ अनन्तेश्वर कुमार मिश्र, पं शालिग्राम शर्मा , डॉ आलोक मिश्र, डॉ मनोज पांडेय आदि उपस्थित थे

ऋग्वेद, शुक्लयजुर्वेद , कृष्णयजुर्वेद घनपाठ तथा सामान और अथर्वपाठ की दुर्लभ प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की विशेष उपलब्धियों को सराहा गया।

केन्द्र की अनुसंधानवल्लरी पत्रिका के 19वीं अंक का विमोचन विद्यालय के अधिकारियों तथा अध्यापकों आदि द्वारा किया गया।

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