प्रेमचंद का यथार्थ मनुष्य के अंतर्द्वंद्व को भी दर्शाता है : – मनोहर लाल

 

वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से प्रेमचंद की स्मृति में आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 2035वें दिवस पर रविवार को प्रेमचंद की कहानी ‘आभूषण’ का पाठ किया गया। कहानी का पाठ भानू प्रताप राय ने किया। इस अवसर पर प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, मनोहर लाल और निदेशक राजीव गोंड ने उन्हें सम्मानित किया। कहानी की समीक्षा करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि प्रेमचंद का यथार्थ केवल सामाजिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्षों को भी गहराई से पकड़ते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य शिक्षित होने के बाद भी अपनी वासनाओं, पूर्वाग्रहों और आकर्षणों से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाता। कहानी के पात्र सुरेश सिंह इसका उदाहरण हैं। शिक्षित और विवेकशील होने के बावजूद वे शीतला के सौंदर्य से प्रभावित होते हैं, लेकिन अंततः अपने भीतर के विकार को पहचानकर उससे संघर्ष करते हैं। यही आत्मबोध उनके चरित्र को नैतिक ऊंचाई प्रदान करता है। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसमें साहित्य प्रेमियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संचालन राजेश श्रीवास्तव, स्वागत नमन श्रीवास्तव तथा धन्यवाद ज्ञापन राहुल यादव ने किया। इस अवसर पर शौर्य तिवारी, दिनेश तिवारी, मो असलम, लियाकत अली, हर्ष गौतम, अब्दुल बतिननमन श्रीवास्तव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, समीक्षा त्रिपाठी, मनोज श्रीवास्तव, विवेक विश्वकर्मा, राजेश प्रसाद, आनंद आदि उपस्थित रहे।

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