करोड़ों के नाले से नहीं निकला पानी, शिलापट्ट भी बयां कर गया विकास का सच

रिपोर्ट:- उपेन्द्र कुमार पांडेय 

 

आजमगढ़। चक्रवाती हवा के साथ सुबह 9 बजे से 3 बजे तक हुई लगातार बारिश ने करोड़ों के नालों की परीक्षा ले ही ली। उस परीक्षा में नाले पूरी तरह से फेल नजर आए और हर बार की तरह से जल भराव की संभावना पास होती दिखी। करोड़ों के नालों से पानी तो नहीं निकल सका और गांधी तिराहा के पास लगा लोकार्पण का शिलापट्ट भी विकास का सच बयां कर गया। नगरपालिका प्रशासन के विकास के दावे बारिश के बाद पानी में डूबते नजर आए। करोड़ों रुपये खर्च कर नालियों और जल निकासी की व्यवस्था करने का दावा करने वाली नगरपालिका की हकीकत अब सडक़ों पर नजर आ रही है। स्थिति यह है कि विकास कार्यों का दम भरने वाला लोकार्पण शिलापट्ट खुद जलमग्न हो चुका है। चुनाव जीतने से पूर्व नगरपालिका चेयरमैन ने जनता से वादा किया था कि नगर की जल निकासी उनकी पहली प्राथमिकता होगी।… लेकिन आज हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। नगर के रैदोपुर स्थित गांधी तिराहे से जीजीआईसी स्कूल की तरफ जाने वाला पूरा मार्ग लबालब पानी से भरा हुआ था। लोगों को घुटने भर गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा।

जीजीआईसी मार्ग पर जलभराव का आलम यह है कि हाल ही में लाखों-करोड़ों की योजना से बने नाले के लोकार्पण का शिलापट्ट जिस पर अध्यक्ष सरफराज आलम मंसूर और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज है वह भी आधा पानी में डूब चुका था। यह नजारा नगरपालिका की अधूरी तैयारियों की पोल खोलने के लिए काफी है। केवल रैदोपुर ही नहीं, बल्कि पूरा नगर क्षेत्र इस समय नारकीय स्थिति झेल रहा है, खुद पालिका कार्यालय के आसपास पानी जमा था। हीरापट्टी से हरिऔध नगर मार्ग पहले से ही गड्ढों में तब्दील है और ऊपर से जलनिकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं। पांडेय बाजार से ब्रह्मस्थान मार्ग तालाब में तब्दील हो चुका था। बदरका ईदगाह, करबला मैदान व दलसिंगार, आसिफगंज जैसे निचले इलाकों में पानी भरने से घंटों परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल नाले की सफाई के नाम पर बजट का बंदरबांट किया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। जल निकासी का कोई सही स्रोत न होने के कारण हल्की बारिश में भी शहर ठहर जाता है। करोड़ों रुपये बहाने के बाद भी जनता जलभराव झेलने को मजबूर है। आखिर कब तक कागजी दावों के सहारे जनता को ठगा जाएगा।

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