
वाराणसी। प्रेमचंद की ‘अग्नि-समाधि’ ऐसी कहानी है, जिसमें सामाजिक यथार्थ और मानवीय करुणा एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। पयाग का पतन, रुक्मिन और सिलिया का संघर्ष, ग्रामीण गरीबी और अंत में रुक्मिन का आत्मोत्सर्ग कहानी को बहुस्तरीय बनाते हैं। यह विचार राम प्रसिद्ध साहित्यकार डा. सुधार सिंह ने रविवार को प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम में कहानी की समीक्षा करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम के 2049वें दिवस पर वरिष्ठ कवि अजीत सिंह ने प्रेमचंद की कहानी ‘अग्नि-समाधि’ का पाठ किया। राम सुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने कहानी में सामाजिक परिस्थितियों के बीच मानवीय संवेदना, संघर्ष और त्याग को प्रभावशाली ढंग से उभारा है। रुक्मिन का आत्मोत्सर्ग कहानी को केवल एक पारिवारिक संघर्ष तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे व्यापक मानवीय संवेदना से जोड़ देता है।
प्रो. श्रद्धानंद ने कहानी की समीक्षा करते हुए कहा कि कहानी का सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि रुक्मिन क्यों मरी, बल्कि यह है कि जिस स्त्री को जीवनभर संघर्ष करना पड़ा और जिसने अपमान व उपेक्षा सही, वही अंततः सबसे बड़े त्याग का परिचय क्यों देती है। प्रेमचंद मनुष्य के भीतर छिपी उस करुणा को सामने लाते हैं, जो व्यक्तिगत द्वेष और संघर्ष से कहीं बड़ी होती है। रुक्मिन की ‘अग्नि-समाधि’ विनाश की नहीं, बल्कि मानवीय त्याग और प्रेम की अमर स्मृति बन जाती है।
कहानी पाठ के बाद वरिष्ठ कवि अजीत सिंह का प्रो. श्रद्धानंद, डा.राम सुधार सिंह, प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव और निदेशक राजीव गोंड ने सम्मान किया। संचालन आयुषी दूबे, स्वागत नमन श्रीवास्तव, धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने किया।

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