
वाराणसी। कमच्छा स्थित वसन्त कन्या महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3120 (वाराणसी क्षेत्र) के सहयोग मंगलवार को एक दिवसीय ‘स्वास्थ्य साक्षरता कार्यशाला’ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस कार्यशाला का मुख्य विषय “स्वास्थ्य साक्षरता स्वस्थ जीवन के लिए: समझें, मूल्यांकन करें और कार्य करें”रहा।
कार्यशाला में महाविद्यालय के विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों तथा आमंत्रित प्रतिभागियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
शुभारंभ अतिथियों के औपचारिक आगमन, दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगान एवं कुलगीत के साथ हुआ। कुलगीत की सुमधुर प्रस्तुति संगीत (गायन) विभाग की छात्राओं ने विभागाध्यक्षा प्रोफेसर सीमा वर्मा के कुशल निर्देशन तथा श्री सौम्यकांति मुखर्जी की तबले पर संगत के साथ की।
रोटेरियन डॉ. विपुल शंकर पांड्या (सहायक गवर्नर, बेसिक शिक्षा एवं साक्षरता, RID 3120) तथा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने समागत अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने सामाजिक सरोकारों के प्रति समुदाय की जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा कि वसंत कन्या महाविद्यालय भारतीय समाज के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हुए अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
डॉ. विपुल शंकर पांड्या, असिस्टेंट गवर्नर, लिटरेसी, रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3120 ने स्वास्थ्य साक्षरता के क्षेत्र में रोटरी क्लब द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संयोजिका प्रो. गरिमा उपाध्याय (गृह विज्ञान विभाग) ने कार्यशाला की रूपरेखा और इसके मुख्य उद्देश्यों की औपचारिक प्रस्तुति करते हुए कहा कि स्वास्थ्य साक्षरता को केवल रोगों और उपचार की जानकारी तक सीमित नही मानते हुए स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी को समझने, उसका विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की क्षमता के रूप में रेखांकित किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ परिवार एवं समुदाय के स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक होने के लिए प्रेरित किया।
रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3120 की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटेरियन श्रीमती पूनम गुलाटी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य जागरूक समाज के निर्माण पर बल दिया।उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण और साक्षरता को समुदाय के समग्र विकास से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को जागरूक एवं उत्तरदायी नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के माननीय कुलपति प्रो. ए. के. त्यागी ने बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में डिजिटल दौर में स्वास्थ्य साक्षरता की आवश्यकता और प्रासंगिकता को रेखांकित किया।उन्होंने संतुलित एवं पौष्टिक आहार को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताते हुए विद्यार्थियों को भोजन और पोषण के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में आयुर्वेद, संतुलित आहार और उचित पोषण के महत्व को रेखांकित किया। स्वास्थ्य प्रतिरक्षा तंत्र के लिए पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य-देखभाल सबसे आवश्यक होते हैं।
इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज काशी हिंदू विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को सही तरीके से समझने और उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने निवारक स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर रोग-निदान तथा स्वस्थ आदतों के रूप में भोजन और पोषण के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक स्तर पर रोगों की पहचान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में सहायक होती है।
उद्घाटन सत्र के दौरान रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3120 द्वारा प्रकाशित ‘दिशा-1’ एवं ‘दिशा-2’ नामक पुस्तकों का औपचारिक विमोचन किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों में पोषण और वेलनेस को बढ़ावा देने हेतु पोषण एवं वेलनेस क्लब “स्वस्ति” का अनावरण भी किया गया।
सत्र का समापन रोटरी क्लब वाराणसी चैप्टर के देव प्रमोद अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
कार्यशाला में दो तकनीकी व अंतःक्रियात्मक सत्र आयोजित किए गए।
प्रथम तकनीकी सत्र में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह ने “पोषण, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य जागरूकता के माध्यम से व्यक्तियों और समुदायों का सशक्तिकरण” विषय पर विचार रखे। उन्होंने डिजिटल माध्यमों पर फैलने वाली भ्रामक जानकारियों के प्रति सतर्क रहने और प्रामाणिक सूचनाओं के मूल्यांकन पर जोर दिया।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (IMS, BHU) के आयुर्वेद संकाय (प्रसूति तंत्र विभाग) की प्रो. अनुराधा रॉय ने “परंपरा और आधुनिकता का संयोजन: आयुर्वेद एवं महिला स्वास्थ्य साक्षरता” विषय पर अपना तकनीकी व्याख्यान प्रस्तुत किया।
सत्र के अंत में प्रतिभागियों के लिए क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस सत्र का संचालन डॉ प्रियंका ने किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र (02:00 – 03:30 बजे) में एमजीपीजी कॉलेज, गोरखपुर की गृह विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका एवं रोटरी पदाधिकारी डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ने “हेल्थ आईक्यू (Health IQ): क्या हम अपने शरीर की भाषा समझते हैं?” विषय पर प्रतिभागियों से सीधा संवाद किया और स्वास्थ्य संकेतों को समझने के व्यावहारिक तरीके बताए।
श्री आशीष टंडन जी (योगाचार्य चैतन्य योग सेवा आश्रम) ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग साक्षरता क्या है? अगर कोई व्यक्ति योग करता है तो उसके अंदर जागरूकता उत्पन्न होती है और जागरूकता के साथ ही वह अपने जीवन में चीजों को स्वीकार करता है। योग हमें अपने मूल संस्कृति से जोड़ता है। आज शारीरिक गतिविधियों के कम होने से हमारे अंदर हार्मोनल असंतुलन पैदा हो रहा है जिससे बीमारियां बढ़ रही है।
श्री आशीष टंडन जी (योगाचार्य चैतन्य योग सेवा आश्रम) ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग साक्षरता क्या है? अगर कोई व्यक्ति योग करता है तो उसके अंदर जागरूकता उत्पन्न होती है और जागरूकता के साथ ही वह अपने जीवन में चीजों को स्वीकार करता है। योग हमें अपने मूल संस्कृति से जोड़ता है। आज शारीरिक गतिविधियों के कम होने से हमारे अंदर हार्मोनल असंतुलन पैदा हो रहा है जिससे बीमारियां बढ़ रही है।
आयोजित समापन सत्र में कार्यशाला की गतिविधियों का सारांश प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात प्रतिभागी प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव एवं प्रतिक्रियाएं साझा कीं। सत्र का संचालन डॉ प्रतिभा यादव ने किया।
विभिन्न सत्रों में डॉ पूर्णिमा, डॉ आरती कुमारी, डॉ आरती चौधरी, डॉ शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ प्रीति विश्वकर्मा, डॉ राजलक्ष्मी, डॉ वर्षा, डॉ नेहा, डॉ सपना भूषण, डॉ कल्पना आनंद, डॉ पूनम वर्मा, डॉ मालविका, डॉ शशिप्रभा सहित महाविद्यालय के कार्यालयीय सदस्यों ने अपना सक्रिय योगदान दिया।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को सहभागिता प्रमाण पत्र तथा अतिथियों व विषय-विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। परामर्श समिति के सदस्यों, प्रोफेसर शांता चैटर्जी, प्रोफेसर संगीता देवडिया और प्रोफेसर मीनू पाठक एवं आयोजन समिति के सदस्यों प्रोफेसर शुभ्रा सिन्हा और डॉ प्रियंका भी स्मृति चिह्न से सम्मानित किये गए।
कार्यशाला का सफल आयोजन महाविद्यालय की प्रबंधक व संरक्षिका श्रीमती उमा भट्टाचार्य, प्राचार्या व मार्गदर्शिका प्रो. रचना श्रीवास्तव, संयोजिका प्रो. गरिमा उपाध्याय (गृह विज्ञान विभाग) तथा रोटेरियन डॉ. विपुल शंकर पांड्या के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यशाला में महाविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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