खादी के ताने-बाने में जीवित है गांधी का विचार, जयंती पर याद किए गए राष्ट्रपिता

वाराणसी। नैपुरा कलां स्थित खादी व ग्रामोद्योग आयोग से प्रमाणित जनहित नायक खादी समिति में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157 वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।

 

कार्यक्रम में गांधी जी के जीवन-दर्शन और स्वदेशी आंदोलन में खादी की भूमिका को याद करते हुए उनके विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया गया।

 

समिति के संचालक श्याम नारायण नायक ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी को केवल कपड़े के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी चेतना से जोड़ा। गांधी जी का प्रसिद्ध विचार “खादी वस्त्र नहीं, विचार है” आज भी समाज को स्वावलंबन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि गांधी जी ने ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया था। खादी इसी सोच का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। आज आवश्यकता है कि उनके स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जाए।

 

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने गांधी जी के सत्य, अहिंसा, सादगी और स्वावलंबन के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

 

इस दौरान संतोष नायक, नर्बदेश्वर नायक, कौशल प्रसाद, संतोष कुमार, चंद्रभान सिंह, रामायण विश्वकर्मा और राजा निषाद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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