विश्वविद्यालय में गाँधी जयंती के अवसर पर ‘महात्मा गाँधी एवं अहिंसा’ विषयक अनेक पर कार्यक्रम हुआ

वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 157 वीं जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की 122 वीं जयंती श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में मनायी गयी। इस अवसर पर ‘महात्मा गाँधी एवं अहिंसा’ विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि महात्मा गाँधी का जीवन सत्य और अहिंसा का अनुपम संदेश देता है।

 

उन्होंने कहा कि महापुरुषों का स्मरण केवल जयंती मनाने तक सीमित न रहकर उनके आदर्शों को जीवन में उतारने के संकल्प का अवसर होना चाहिए। उन्होंने सिद्ध किया कि अहिंसा दुर्बलता नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम और नैतिक साहस की सर्वोच्च शक्ति है। उनके लिए अहिंसा केवल हिंसा का त्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म में करुणा, सत्य और सद्भाव का भाव था।

 

आज गाँधी जी के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हैं। विशेषकर युवा पीढ़ी यदि सत्य को जीवन का आधार, अहिंसा को आचरण और सेवा को अपना संकल्प बनाए, तो यही राष्ट्रपिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी को स्मरण करते हुए कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि शास्त्री जी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है। गाँधी जी और शास्त्री जी दोनों ने अपने जीवन एवं आचरण से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी। दोनों महापुरुषों की जयंती एक साथ मनाना नई पीढ़ी के लिए उनके जीवन-मूल्यों से प्रेरणा लेने का महत्वपूर्ण अवसर है।

 

 

जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में स्थित अति प्राचीन महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा सहित उपस्थित आचार्यों एवं अतिथियों ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

कार्यक्रम के संयोजक सामाजिक विज्ञान विभाग के आचार्य एवं छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि महापुरुषों के जीवन से हमें जीवन जीने की कला प्राप्त होती है। उनके विचार विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वृत्तचित्र बनाने तथा समय-समय पर संगोष्ठी एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित कर नई पीढ़ी को उनसे परिचित कराने पर बल दिया।

 

मुख्य वक्ता न्याय विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दुर्गेश पाठक ने कहा कि साक्षर होना और शिक्षित होना अलग-अलग विषय हैं। महापुरुष शिक्षित और साक्षर के मध्य सेतु का कार्य करते हैं। गाँधी जी और लालबहादुर शास्त्री जी ने अपने जीवन एवं आचरण से समाज के सामने अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किए।

 

अर्थशास्त्र विभाग के आचार्य एवं पुस्तकाध्यक्ष प्रो. राजनाथ ने कहा कि वर्तमान समय अमृत काल का है। यह अपनी विरासत, परम्परा और संस्कृति पर स्वाभिमान करने तथा राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने वाले महापुरुषों को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने पूर्वजों एवं आदर्श महापुरुषों के जीवन से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

 

वेदांत के वरिष्ठ आचार्य प्रो. सुधाकर मिश्र ने भी महात्मा गाँधी के जीवन-मूल्यों एवं अहिंसा के सिद्धान्त की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

 

कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात माँ सरस्वती एवं महात्मा गाँधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। स्वागत एवं संचालन डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सत्येन्द्र कुमार ने आभार व्यक्त किया।

समापन अवसर पर सभी उपस्थित आचार्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक राष्ट्रगान किया गया।

 

इस अवसर पर प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. राजनाथ, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. दुर्गेश पाठक, डॉ. सत्येन्द्र कुमार सहित विश्वविद्यालय के आचार्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *