
वाराणसी ।एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप, यूनिट: VKM-17D, वसंत कन्या महाविद्यालय, कमाच्छा, वाराणसी द्वारा एक आउटरीच कार्यक्रम काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विश्वनाथ मंदिर से पूरे कैंपस से होते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मेन गेट तक एक मेंटल हेल्थ अवेयरनेस रैली ऑर्गनाइज़ की गई।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने अपना आशीर्वचन दिया।
यह रैली मेंटल हेल्थ डे की थीम “सुने हुए अनुभव: असली आवाज़ें, असली बदलाव” पर आधारित थी। इसका मकसद अपनी मेंटल हेल्थ को पहचानना, उसका ध्यान रखना और मदद लेने में कभी हिचकिचाना नहीं, मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और अपने आस-पास के माहौल में फैली गलत सोच को खत्म करना और मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित चीजों पर चर्चा करना, बिना किसी डर, शर्म या झिझक के प्रोफेशनल मदद लेने की अहमियत पर ज़ोर देना था।
यह रैली सुबह एन एस एस स्वयंसेविकाओं द्वारा ताली तथा एन एस एस गीत से प्रारंभ हुआ। इसके बाद स्वयंसेविकाओं द्वारा मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से उन्होंने परिसर में उपस्थित स्टूडेंट्स और लोगों को यह मैसेज देने की कोशिश की कि मेंटल हेल्थ पर भी उतना ही ध्यान और देखभाल देना जरूरी है जितना फिजिकल हेल्थ पर।
वॉलंटियर्स ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी को नज़रअंदाज़ करना या छिपाना नहीं चाहिए और मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे लोगों को ज़रूरत पड़ने पर किसी क्वालिफाइड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
इस पहल में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि प्रोफेशनल मदद लेना कमज़ोरी नहीं, बल्कि अवेयरनेस और हिम्मत की निशानी है।
इस नुक्कड़ नाटक में परिवार और दोस्ती के डायनामिक्स को दिखाते हुए यह बताया गया कि इमोशनल परेशानी का सामना कर रहे लोग अक्सर समझ और सपोर्ट के लिए अपने प्रियजनों की ओर कैसे देखते हैं। हालांकि, इसमें यह भी दिखाया कि कैसे परिवार के सदस्य और दोस्त कभी-कभी ऐसी मुश्किलों को नज़रअंदाज़ करते हैं या गलत समझ लेते हैं कि जिनका मानसिक स्वास्थ्य खराब है वो पागल हैं। नुक्कड़ नाटक ने इन गलत फहमियों को चुनौती दी और बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को कभी भी मज़ाक में नहीं लेना चाहिए बल्कि उसका डटकर सामना करना चाहिए उर बताया गया कि जिस तरह हम अपने दैहिक स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं उसी तरह हम अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए।
कार्यक्रम में 100 स्वयंसेविकाओं के साथ-साथ अन्य छात्र छात्राओं ने भी बाद चढ़कर हिस्सा लिया। प्रोग्राम का समापन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शपथ दिलाने और राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह पहल स्टिग्मा को सेंसिटिविटी से, चुप्पी को बातचीत से और गलतफहमियों को अवेयरनेस से बदलने की एक सामूहिक अपील थीI क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य मायने रखता है।

Leave a Reply