“नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की आधारशिला हैं; युवा शक्ति के संकल्प से ही 2047 का भारत गढ़ेगा अपना गौरवशाली भविष्य”:–कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा

वाराणसी।प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय आह्वान के अनुरूप ‘नशा मुक्त युवा–विकसित भारत के लिए संकल्प अभियान’ के अंतर्गत गुरुवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग मुख्य भवन से नशामुक्ति एवं युवा-जागरूकता का सशक्त संदेश देते हुए एक भव्य साइकिल यात्रा निकाली गई।

 

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने हरी झंडी दिखाकर साइकिल यात्रा को रवाना किया।

 

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, युवाओं एवं स्वयंसेवकों ने अत्यन्त उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ इस अभियान में सहभागिता की। साइकिल यात्रा के माध्यम से युवाओं ने न केवल नशे के दुष्परिणामों के प्रति समाज को जागरूक किया, बल्कि स्वस्थ जीवन, संस्कार, सकारात्मक ऊर्जा, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण का प्रभावशाली संदेश भी जन-जन तक पहुँचाया।

 

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर और मन को ही दुर्बल नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र की सामूहिक शक्ति को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, संस्कारवान, जागरूक और नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की वास्तविक शक्ति और उसकी सबसे सुदृढ़ आधारशिला हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, संकल्प और रचनात्मक क्षमता को यदि सकारात्मक दिशा प्रदान की जाए तो यही शक्ति राष्ट्र के विकास की गति को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए आवश्यक है कि देश का युवा नशे से मुक्त होकर ज्ञान, संस्कार, सृजन, नवाचार, खेल, सेवा और राष्ट्र निर्माण के पथ पर अग्रसर हो।

 

कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि नशामुक्ति केवल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जीवन-शैली का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुख-शान्ति, समाज के स्वास्थ्य और राष्ट्र की प्रगति से जुड़ा व्यापक सामाजिक दायित्व है। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए शासन और प्रशासन के प्रयासों के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की सजग एवं सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।

 

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वयं नशे से दूर रहने का संकल्प लें और अपने मित्रों, सहपाठियों तथा समाज के अन्य युवाओं को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नशामुक्त युवा विकसित भारत की मजबूत नींव है और प्रत्येक युवा का सकारात्मक संकल्प राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है।

कुलपति ने कहा कि “नशामुक्ति को युवा चेतना से और युवा चेतना को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना आज की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकताओं में से एक है।”उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं की सामूहिक जागरूकता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर भारत को नशामुक्त, स्वस्थ, संस्कारित और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की जा सकती है।

 

 

विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकाय प्रमुख एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि युवा देश की रीढ़ हैं और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति युवा शक्ति के समक्ष एक गंभीर सामाजिक चुनौती है।

 

उन्होंने कहा कि नशामुक्त युवा ही स्वस्थ समाज, सशक्त राष्ट्र और विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला हैं।

 

उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने साथियों एवं आसपास के लोगों को भी नशे से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जेन-जी (Gen Z) देश की नई ऊर्जा और परिवर्तन की अग्रदूत पीढ़ी है। उसकी प्रतिभा, तकनीकी दक्षता, सृजनात्मकता और नवोन्मेषी सोच को नशे की प्रवृत्तियों से बचाकर शिक्षा, संस्कार, खेल, नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में नियोजित किया जाना समय की आवश्यकता है।

 

प्रो. मिश्र ने कहा कि यदि जेन-जी नशामुक्ति को अपने जीवन का संकल्प बनाकर आगे बढ़ती है तो यह अभियान केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवारों और समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि युवा स्वयं परिवर्तन के वाहक बनें और नशामुक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

 

राष्ट्रगान एवं भारत माता के जयघोष के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों एवं युवाओं ने स्वयं नशे से दूर रहने तथा समाज को भी नशामुक्त बनाने के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया।

 

इसके उपरान्त कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल यात्रा को रवाना किया। सैकड़ों साइकिल सवार युवा विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से प्रस्थान कर लहुराबीर, आजाद पार्क, मैदागिन चौराहा, पटेल धर्मशाला एवं तेलियाबाग होते हुए पुनः मुख्य भवन की ओर रवाना हुए।

साइकिल यात्रा में सम्मिलित युवाओं के हाथों में ‘नशा मुक्त भारत’, ‘युवा जागो, नशा भागो’, ‘नशा मुक्त भारत–स्वस्थ भारत’ सहित विभिन्न प्रेरणादायी संदेशों से युक्त तख्तियां एवं बैनर रहे। मार्ग में युवाओं ने लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए स्वस्थ, संस्कारित एवं उत्तरदायी समाज के निर्माण का संदेश दिया।

 

नशामुक्ति अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के लिए युवाओं को डिजिटल माध्यम से भी सहभागी बनाया गया। अभियान में सम्मिलित प्रतिभागियों ने ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकरण कराया तथा डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त किए। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय के युवाओं की सहभागिता को व्यापक राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान से जोड़ा गया।

 

आयोजकों ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर से निकली यह साइकिल यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यापक एवं दीर्घकालिक जन-जागरूकता अभियान का शुभारम्भ है। 100 सप्ताह तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी संकल्प अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग और विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।

इस क्रम में खेलकूद प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों तथा विभिन्न जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा अपनी ऊर्जा को रचनात्मक एवं राष्ट्रहितकारी गतिविधियों में लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. विधु द्विवेदी,प्रो राजनाथ,प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. विजेन्द्र कुमार, डॉ. नितिन कुमार, डॉ. दुर्गेश पाठक सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

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