आरोग्य देवता के दर्शन को धन्वंतरि के दरबार में भक्तों की उमड़ी भीड़

 

 

 

वाराणसी। भगवान विष्णु के 12 वें अवतार एवं आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का जन्म धनत्रयोदशी के दिन हुआ था।

धनतेरस के दिन शुक्रवार को भगवान धन्वंतरि का सुड़िया स्थित स्व. शिवकुमार शास्त्री के धन्वंतरि निवास में स्थापित अष्ठ धातु की मूर्ति को दोपहर में चांदी के छत्र के नीचे विराजमान कराया गया और पूरे विधि विधान से पांच ब्राह्मणों नें पूजन अर्चन किया। दोपहर में वैद्यराज के तीनों पुत्र पं रामकुमार शास्त्री, पं नन्द कुमार शास्त्री,पं समीर कुमार शास्त्री नें भगवान का हिमालय एवं अन्य जगहों से मंगाए गए सुगन्धित फूलों से श्रृंगार किया एवं दुर्लभ आयुर्वेदिक औषधियों के साथ फल लड्डू इत्यादि का भोग लगाकर महाआरती की। सायंकाल 5 बजे मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। धन्वंतरि मंदिर के द्वार पर शहनाई की मंगल धुन के साथ पूरा मंदिर प्रांगण जड़ी बुटियों एवं फूलों के सुगंध की आरोग्यवर्धक अमृतरस से सराबोर था। खुले आसमान के नीचे मंदिर प्रांगण में श्रद्धालु भगवान धनवंतरि चतुर्भुजी प्रतिमा के आगे नतमस्तक होकर सर्वरोग से रक्षा एवं वर्ष भर निरोग रहने का आशीर्वाद माँगा। भगवान विष्णु की तरह ही भगवान धन्वंतरि के एक हाथ में शंख और दूसरे चक्र जबकि अन्य दो हाथों में जल का पात्र और अमृत कलश सुशोभित था। इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल के बर्तन एवं अन्य सोने एवं चांदी के आभूषण भी खरीदने की परम्परा है। दर्शन पाने के लिए देर रात तक दर्शानार्थियों की भारी भीड़ रही। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात थी।

आरोग्य के देवता के दर्शन पाने हेतु काशी के गणमान्य अधिकारीगणों एवं समाजसेवी विधायकों का भी ताँता लगा रहा। उत्पल शास्त्री कोमल शास्त्री आदित्य एवं मिहिर शास्त्री पवन सिंह नें सभी श्रद्धालुओं को भगवान को लगे भोग का प्रसाद वितरित किया। इस अवसर मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा, हिन्दू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी अंबरीश सिंह भोला, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय,पवन कुमार सिंह आदि की उपस्थिति रही।

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