छात्र फोरम संस्कृति में छात्रों ने अयोध्या के पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व पर डाला प्रकाश

वाराणसी, 16 अप्रैल। भारतीय संस्कृति में अयोध्या सिर्फ धार्मिक महत्व का स्थान मात्र नही है अपितु पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमि है। पुराणों में वर्णित अयोध्या के हजारों वर्षों के पुरावशेष आज भी अयोध्या के विभिन्न स्थानों पर खुदाई के दौरान प्राप्त होते रहे है, जिससे अयोध्या के महत्व को समझा जा सकता है। ये बातें मंगलवार को डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के छात्र फोरम ‘संस्कृति’ के तत्वावधान में आयोजित ‘अयोध्या का पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व’ विषयक संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य प्रो. सत्यगोपाल जी ने कहा कि अयोध्या का इतिहास भारत की विरासत से जुड़ा हुआ है, बाद में जिसके साथ कानूनी विवाद भी जुड़ गया जो सदियों तक चलता रहा। कालिदास ने अयोध्या को साकेत नाम दिया, जो ज्ञान से प्रकाशित भूमि रही है। वर्तमान में अयोध्या पर्यटन के दृष्टि से विकसित हो रही है साथ ही पारंपरिक कला एवं शिल्प को भी विकसित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राम सांस्कृतिक उत्थान के राष्ट्रीय प्रतीक है।

संस्कृति फोरम के समन्वयक डॉ. ओम प्रकाश कुमार ने कहा कि अयोध्या में उत्खनन कार्य ने भारतीय जनमानस पर लम्बे समय से पड़ रहे दबाव से मुक्ति दिलाया और तथ्यों के आधार पर पुनः भारतीय संस्कृति के धार्मिक आयाम को प्रतिस्थापित किया। कार्यक्रम में छात्रा अरीना पाण्डेय ने विषय स्थापना, छात्र सचिन मौर्य ने अयोध्या के ऐतिहासिक महत्व, अनघा नायर ने अयोध्या के आर्किटेक्चर, पवन एवं नंदिनी ने सिक्को, अभिषेक यादव ने टेराकोटा पर पीपीटी प्रस्तुत किया। इनके अलावा अमन सिंह, कार्तिकेय, स्वर्णिका स्वप्निल, विशाखा यादव, उत्तीथा त्रिपाठी, आदर्श पाठक आदि ने भी विचार रखे। संचालन शुभी कृष्णा एवं साधना एवं धन्यवाद ज्ञापन आकाश कुमार सिंह ने दिया। इस अवसर पर प्रो. सीमा, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. शशिकांत सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

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