
नजर न्यूज नेटवर्क/ सांस्कृतिक प्रतिनिधि
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के एक ऐसे रचनाकार थे जिनका साहित्य भारतीय जनमानस मे हमेशा से ही लोकप्रिय रहा है, उन्होने साहित्य की लगभग सभी विधाओ मे खूब लिखा परन्तु जितनी ख्याति उन्हे कहानियों के माध्यम से मिली वह अन्य विधा मे लिखे साहित्य से नही। उनकी लिखी कहानियों ने हमेशा से ही पाठको का भरपूर मार्गदर्शन व ज्ञानवर्धन किया। उनका लिखा साहित्य हमेशा से ही प्रासंगिक रहा है। यह बात मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट, लमही की ओर से प्रेमचंद स्मारक लमही में आयोजित दैनिक कार्यक्रम सुनों मैं प्रेमचंद के 1161 दिन पूरे होने पर संस्था के निदेशक राजीव गोंड ने कही। प्रेमचंद की बाल कहानी पालतू भालू का पाठ साक्षी यादव ने किया। सुरेश चंद्र दूबे ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में अपने काल का इतिहास बोलता है। साथ ही जन साधारण की भावनाओं, परिस्थितियों और उनकी समस्याओं का मार्मिक चित्रण दिखाई पड़ता है। इस अवसर पर चंदन, राहुल, विवेक, आदिति राय, अजय यादव,रामजी सिंह, मेवालाल श्रीमाली, राहुल विश्वकर्मा, देव बाबू, प्रांजल कुमार,मनोज विश्वकर्मा, मनोज श्रीवास्तव आदि थे।
