
वाराणसी।भगवान हनुमान का जीवन और शिक्षाएं हमें मजबूत मूल्यों और सिद्धांतों को विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं। भगवान राम के प्रति उनका अटूट समर्पण और प्रतिकूल परिस्थितियों में अपनी अद्भुत कूटनीतिक समझ के आधार पर समस्याओं के समाधान के प्रति उनका अटूट विश्वास हम सभी के लिए आशा और मार्गदर्शन की किरण है।
जब हम अपने जीवन की चुनौतियों का सामना करते हैं, तो हमें हनुमान के अटूट संकल्प और अप्रतिम उत्साह से शक्ति प्राप्त करनी चाहिए। उनकी कर्तव्यनिष्ठा से स्थापित उनके आदर्श हमें उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने, दूसरों की निस्वार्थ सेवा करने और ज्ञान के संवर्धन और बौद्धिक आचरण में दृढ़ रहने के लिए प्रेरित करते हैं ।
महावीर के व्यक्तित्व और उनकी गहन शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए महावीर के अहिंसा, सत्य, संयम और अपरिग्रह के संदेश पर जोर दिया और बताया कि यह आज की दुनिया में भी ये अत्यन्त प्रासंगिक है।
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में आज श्रमण विद्या संकाय के अन्तर्गत हनुमान जयन्ती एवं भगवान महावीर जयन्ती समारोह के अवसर पर व्यक्त किया।
कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि
हनुमान जी बुद्धि, ज्ञान , साहस, बहादुरी,शक्ति और कूटनीतिक समझ के प्रतीक हैं, जो दूसरों को आत्मविश्वास और दृढ़-संकल्प के साथ चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं।
24वें जैन तीर्थंकर ने अहिंसा और करुणा के प्रतीक के रूप में कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद अपनी शिक्षाओं का प्रचार करने में महावीर के साहस और दृढ़ संकल्प पर प्रकाश डाला।
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ,नई दिल्ली की प्रो कल्पना जैन ने कहा कि उन्होंने सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत कल्याण को बढ़ावा देने में महावीर के दर्शन के महत्व को भी रेखांकित किया।
प्रो फूलचंद जैन ने महावीर के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और अधिक दयालु और शांतिपूर्ण समाज बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ मंगलाचरण, कुलपति एवं अन्य द्वारा दीप प्रज्वलन एवं भगवान हनुमानजी एवं महावीर स्वामी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
स्वागत भाषण संकाय के अध्यक्ष प्रो हरिशंकर पाण्डेय ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन प्रो रमेश प्रसाद ने किया।
उक्त अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो शैलेश कुमार मिश्र, प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो महेंद्र पाण्डेय,प्रो विधु द्विवेदी,
,डॉ रविशंकर पाण्डेय, शोधार्थी एवं अन्य विद्यार्थियों ने सहभाग किया।
