वाराणसी। प्रेमचंद की मानवीय संवेदना की कहानी मुक्ति मार्ग के सौ साल पूर्ण होने पर प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही की ओर से आयोजित सूनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ में अतिथियों का स्वागत करते हुए राजीव ने कहा कि हिंदी के आधुनिक काल के कुशल कहानीकार थे प्रेमचंद। मानवीय स्थिति के संबंध में उनकी वास्तविक चिंताएं थीं। वह अपने चारों ओर मूर्खता, पाखंड और अनावश्यक अमानवीयता देख रहे थे। लेकिन नकारात्मक हुए बिना, यह दृढ़ विश्वास रखते हुए कि हम सभी अंततः मानव हैं, उन्होंने खूबसूरती से मर्मस्पर्शी कहानियाँ बुनीं, जिनमें विभिन्न विषयों को शामिल किया।

मुंशी प्रेमचंद की कहानी मुक्ति मार्ग का पाठ लेखिका प्रो इसरत जहाँ ने किया। कहा कि इस उत्कृष्ट कहानी का कथानक वास्तव में यथार्थवादी है और हम इन पहलुओं को हर जगह घटित होते हुए देखते हैं। इसमें सामान्य मानवीय संघर्षों की सार्वभौमिकता है। फिर भी, एक सच्चे कलाकार की तरह, प्रेमचंद पूरी ईमानदारी से सादगी के साथ ऐसी घटनाओं को बुनते हैं जो धीरे-धीरे चरम पर पहुंचती हैं। अचानक अंत में, संघर्ष सुलझ जाता है और उच्चतम दार्शनिक रूप से महत्वपूर्ण कहानियों की परंपरा में, हम सभी को सोचने पर मजबूर कर देते है। इस अवसर पर डा.व्योमेश चित्रवंश, सुर्यभान सिंह, शैलेश श्रीवास्तव, मनोहर, सुमित श्रीवास्तव, उत्कर्ष वर्मा, राहुल यादव,सुरेश चंद्र,मनोज विश्वकर्मा,राजेश श्रीवास्तव आदि थे।

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