
वाराणसी।रविवार को कवितांबरा के सभागार में शिवपूजन विद्यार्थी की दो पुस्तकें – फैसला कठिन था और जीने का मकसद।दो उपन्यास।
डॉ बृजेंद्र नारायण द्विवेदी शैलेश की रचित दो खंडकाव्य पाषाणी तथा सुजाता की खीर का लोकार्पण हुआ।
कविताम्बरा के यशस्वी संपादक हीरालाल मिश्र मधुकर ने डॉक्टर शैलेश का अंगवस्त्रम माल्यार्पण और प्रशस्ति पत्र देकर स्वागत किया । प्रोफेसर श्रद्धानंद , गौरी शंकर तिवारी त्रिपाठी , डॉक्टर गिरीश पांडे, कानपुर से पधारी हुई सुमन लता गर्ग, सभी ने कृतियों पर भरपूर प्रकाश डाला और इस समय की आवश्यकता बताई। आगंतुक सभी साहित्यकारों और अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन कविवर भोलानाथ त्रिपाठी बीरबल ने प्रकट किया। इस अवसर पर डॉक्टर शैलेश ,डॉक्टर करुणा सिंह, डॉक्टर निशा समीम गाज़ीपुर, डॉक्टर शरद श्रीवास्तव, रविकांत मिश्रा, डॉक्टर सुबाष चंद्र, आलोक, एक लाख अहमद भारतीय, ने दिन दिल खोलकर काव्य पाठ किया ।
इस अवसर पर शिवपूजन लाल विद्यार्थी जैसे सर्वतो मुखी रचनाकार के नाम पर बनारस रेलवे कार्यशाला की विशिष्ट सदस्य अखलाक अहमद भारतीय ने वर्ष में एक बार साहित्यकारों को पुरस्कृत करने की घोषणा किया।
अध्यक्ष पंडित गौरी शंकर तिवारी ने साहित्य को मानव जीवन के लिए आवश्यक जीवन तत्व के रूप में रेखांकित किया। साहित्यकारों को निरंतर सृजन के लिए प्रेरित किया।
