वाराणसी। हिन्दी साहित्य की नवगीत विधा के सशक्त हस्ताक्षर शुभम् श्रीवास्तव ‘ओम’ का असामयिक निधन साहित्य की बडी क्षति है। उनके जाने से गीतो की एक सुमधुर लय अपने लय में आने से पहले टूट गई। यह बात अर्दली बाजार स्थित जिला राजकीय पुस्तकालय में साहित्यकारों की ओर से आयोजित शोक सभा में वक्ताओं ने कही।

कवि डॉ. अशोक सिंह ने कहा शुभम् श्रीवास्तव गीत विधा की बडी सम्भावना के रूप में उभर रहें थे। कवि ओम धीरज ने टटके बिम्बो के लिए शुभम को याद करते हुए उन्हे श्रेष्ठ कवि की संज्ञा दी। डॉ.राम सुधार सिंह ने कहा की शुभम नवगीत के प्रखर रचनाकार थे, असमय उनका कालकवलित होना नवगीत के लिए एक बडा खालीपन हो गया। हिमांशु उपाध्याय ने कहा की शुभम नवगीत की एक बडी उम्मीद थें। इस दौरान अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए संतोष कुमार, प्रसन्नवदन चतुर्वेदी “अनघ” व सिद्धनाथ शर्मा ने कहा कि शुभम अपनी रचनाओ में हमेशा जीवंत बने रहेंगे। जिला पुस्तकालयाध्यक्ष कंचन सिंह परिहार सभा की अध्यक्षता की। इस अवसर पर कई अन्य सहित्यकार, गीतकार उपस्थित रहें।

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