
वाराणसी ।महानगर के अन्तर्राष्ट्रीय हाकी खेल मैदान के निकट वीडीए.कालोनी में साहित्यिक संस्था काव्यायिनी के संस्थापक, अध्यक्ष, पूर्व जिला जज एवं अंतर्राष्ट्रीय गज़लकार डॉ. चंद्रभाल सुकुमार के अध्यक्षता में, श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश एवं नादान परिंदे साहित्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.सुबाष चंद्र के संयोजन में कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक के संचालन में आजमगढ़ के प्रख्यात कवि उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट आजमगढ़ी की 83 वर्ष की अवस्था में स्वर्गवास की सूचना पर मंचीय एवं आनलाईन शोक श्रद्धांजलि, काव्यांजलि का आयोजन किया गया। जिसमें मुंहफट जी के जिन्दादिल रचनाधर्मिता को दाद देते हुए उनके स्वर्गवास होने पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त किया गया। कार्यक्रम संयोजकद्वय श्रीप्रकाश कुमार श्रीवास्तव गणेश एवं डॉ.सुबाष चंद्र ने अपने -अपने संबोधन में मुंहफट जी को स्पष्टवादी जिन्दादिल रचनाकार बताते हुए मृत आत्मा एवं शोक संतप्त परिजनों को शांति देने की ईश्वर से प्रार्थना किया। संचालक कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने कहा कि स्वर्गीय उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट, रचनाधर्मिता के स्वर साधक थे जो भी कहते थे निःसंकोच स्पष्ट, गिरीश पाण्डेय बनारसी ने कहा कि मुंहफट जी सचमुच महान थे, स्वर, शब्द श्रृजन के महारथी जैसे आसमान थे, जयशंकर सिंह ने मुंहफट जी जैसा वाक् स्पष्ट रचनाकार कम मिलते हैं,मणिबेन द्विवेदी ने कहा कि हर शब्द श्रृजन को करते थे शॉर्टकट, ऐसे शब्द ऋषि थे प्यारे कवि मुंहफट, सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध ने कहा कि शब्दों के ऋषि हर पल,हर क्षण ज्यादातर साहित्य सारथी अपने थे कवि उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट, धर्म देव यादव गाजीपुरी ने कहा कि सरल हृदय स्पष्टवादी कवि थे उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट जी, सुखमंगल सिंह मंगल ने कहा कि उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट जी हम सबके प्यारे, दुलारे रचनाकार थे,
शब्द ऋंखला के महारथी रचनाकार थे,अमरनाथ तिवारी अमर ने कहा कि उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट जी पूर्वाचल के रचनाकारों में आन-बान शान थे, रहते थे धरा पर लेकिन उनकी शब्द श्रृजन शैली आसमान सी थी, महेन्द्र अलंकार ने मुंहफट जी का कोई और जोड़ नहीं, मंच के सरताज अब कोई आपके जैसा और नहीं, विनय बहुमुखी ने हरफनमौला, हरदिल अज़ीज़ उमेश चन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट जी की रचनाएं अमर रहें, युवा कवि यशवन्त यादव ने मुंहफट जी की शैली को बारम्बार प्रणाम, सर्वधर्म समभाव सपूत को बारंबार प्रणाम, कृष्णानंद दूबे गोपाल ने ज़िन्दगी भर जिन्दादिली के मंच के अपने प्यारे कवि थे मुंहफट उमेशचन्द्र जी स्वर्ग सिधारे आज, भींगी पलकें लुप्त हो चुकी अब उनकी आवाज, तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु ने ज़िन्दगी के दौर को साहित्यमय वो अग्रज मुंहफट जिया, शब्द रस से हर श्रोताओं को उन्होंने था मंत्रमुग्ध किया। आयोजन के अन्त में अध्यक्षीय संबोधन करते हुए पूर्व जिला जज एवं अंतर्राष्ट्रीय गज़लकार डॉ. चंद्र भाल सुकुमार ने उमेशचन्द्र श्रीवास्तव मुंहफट को शब्दों का जादूगर और साहित्यिक मंचों का सरताज और समसामयिक स्पष्टवादी रचनाकार बताते हुए कहा कि उनके पदचिन्हों पर चलकर साहित्यिक रचनाधर्मिता में शीर्षस्थ स्थान हासिल किया जा सकता है। धन्यवाद आभार बुद्धदेव तिवारी ने किया।
