वाराणसी।त्याग, समर्पण, शुभ कर्म अपने प्रिय खाद्य पदार्थों एवं मूल्यवान् सुगंधित पौष्टिक द्रव्यों को अग्नि एवं वायु के माध्यम से समस्त संसार के कल्याण के लिए यज्ञ द्वारा वितरित किया जाता है। वायु शोधन से सबको आरोग्यवर्धक साँस लेने का अवसर मिलता है। यज्ञ का धूम्र आकाश में-बादलों में जाकर खाद बनकर मिल जाता है। वर्षा के जल के साथ जब वह पृथ्वी पर आता है, तो उससे परिपुष्ट अन्न, घास तथा वनस्पतियाँ उत्पन्न होती हैं, जिनके सेवन से मनुष्य तथा पशु-पक्षी सभी परिपुष्ट होते हैं। यज्ञागि्न के माध्यम से शक्तिशाली बने मन्त्रोच्चार के ध्वनि कम्पन, सुदूर क्षेत्र में बिखरकर लोगों का मानसिक परिष्कार करते हैं, फलस्वरूप शरीरों की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी बढ़ता है।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने एक वर्ष चलने वाले चतुर्वेद स्वाहाकार विश्वकल्याण महायज्ञ के तीन माह की पूर्णता पर व्यक्त किया।

इस अवसर पर राजस्थान जोधपुर से पधारे श्री अग्निहोत्री जी ने बताया कि इस प्रकार का महायज्ञ अपने आप में अद्वितीय एवं अनूठा है, जिससे सम्पूर्ण विश्व में शान्ति स्थापित हो रही है। साधना आश्रम , जसदी वैद्यनाथ से पधारे स्वामी महन्त अंगद दास जी महाराज ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में सामंजस्यता, परस्पर मैत्रीभाव स्थापना के साथ पर्यावरण में शुद्धि होती है।

संयोजक एवं आचार्य डॉ. विजय कुमार शर्मा ने बताया कि गीता में कहा है कि यज्ञ से पर्जन्य एवं पर्जन्य से शुद्ध अन्न की प्राप्ति होती है। जिसको ग्रहण करने पर मन की मलिनता दूर होने के साथ ही सम्पूर्ण भूमण्डल में आनन्द का संचरण होता है।

रुद्रमहायज्ञ के तृतीय दिवस एक सौ से अधिक भक्तों ने रुद्र स्वाहाकार किया।

इस अवसर पर डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा, ललित जी, हनेश जी, राकेश लोहिया, कैलाश कंसारा, आनंदकृष्ण, जयन्तीलाल, योगेश जी, ओमप्रकाश जी, प्रदीप कुमार आदि अनेक राजस्थान के भक्तों ने सपत्नीक उपस्थित होकर यज्ञ में आहुति प्रदान की।

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